डोमिनगढ़-गोरखपुर तीसरी लाइन के लिए 23 सितंबर से 28 सितंबर तक ब्लॉक लेने की तैयारी
गोविंदनगर-टिनिच-गौर-बभनान ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य के लिए अगस्त के पहले सप्ताह में मांगा समय
गोरखपुर। छपरा-गोरखपुर-लखनऊ रूट पर तीसरी लाइन और ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य के लिए रेल प्रशासन ने दो मेगा ब्लॉक लेने की तैयारी की है। अगस्त और सितंबर में रेलवे बोर्ड से इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके चलते अलग-अलग तिथियों में 50 से अधिक ट्रेनें निरस्त की जाएंगी और करीब 100 ट्रेनों को रास्ता बदलकर चलाया जाएगा। तीसरी लाइन और ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य के पूरा होने के बाद ट्रेनों का संचलन आसान हो जाएगा और ट्रेनें इन ट्रैक पर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी।
डोमिनगढ़-गोरखपुर तीसरी लाइन का काम पूरा हो चुका है। रेल प्रशासन ने प्री-इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग कार्यों के लिए 18 अगस्त से पांच दिन का ब्लॉक मांगा था। अब प्रस्ताव को बदल दिया गया है। रेल प्रशासन ने 23 सितंबर से 28 सितंबर तक के लिए मेगा ब्लॉक मांगा है। मेन लाइन पर काम होने के चलते पांच दिनों तक 50 से ज्यादा ट्रेनें निरस्त की जाएगी और 70 से ज्यादा ट्रेनों को बढ़नी-गोंडा के रास्ते चलाने की तैयारी है।
इसके अलावा गोरखपुर-गाेंडा रेलखंड पर गोविंदनगर-टिनिच-गौर-बभनान 24.64 किमी लंबाई में रेल लाइन पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य के क्रम में नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के लिए मेगा ब्लॉक मांगा गया है। इसके लिए नौ पैसेंजर ट्रेनों को निरस्त करने और 22 एक्सप्रेस ट्रेनों को गोरखपुर-बढ़नी-गोंडा के रास्ते चलाने की योजना है। हालांकि, इसके लिए पहले 26 व 27 जुलाई को मेगा ब्लाॅक मांगा गया था लेकिन फिर इसे निरस्त कर दिया गया। अब फिर से मेगा ब्लॉक के लिए समय मांगा गया है।
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तीसरा ब्लॉक: देवरिया-भटनी ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य भी अंतिम चरण में
देवरिया-भटनी के बीच ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य भी जल्द ही पूरा होने वाला है। इसके लिए भी सितंबर में दो दिन का ब्लॉक लेने की तैयारी है। इस कार्य के पूरा होने के बाद इस रेल खंड पर ट्रेनें आगे-पीछे चलने लगेंगी।
वर्जन
गोरखपुर-लखनऊ खंड पर तीसरी लाइन का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में डोमिनगढ़-गोरखपुर तीसरी लाइन निर्माण के लिए प्री-इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग कार्य एवं गोविंदनगर-टिनिच-गौर-बभनान ऑटोमेटिक सिग्नलिंग कार्य की कमीशनिंग के लिए यातायात ब्लॉक की तैयारी चल रही है। इन कार्यों के पूर्ण होने से ट्रेनों का संचलन आसान हो जाएगा।
-पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर