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Gorakhpur News: ऑनलाइन लोन एप के बहाने ब्लैकमेल, व्यापारी से 6.50 लाख ठगे गए

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ठगी के शिकार पीड़ित ने साइबर ठगों के खिलाफ साइबर थाने में दर्ज कराया केस
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गोरखपुर। कैंट थाना क्षेत्र के अलहदादपुर निवासी व्यापारी चित्रांश पाठक ने साइबर थाने में ठगी का केस दर्ज कराया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन लोन एप डाउनलोड करने के बाद फर्जी एजेंटों और ब्लैकमेलरों के चंगुल में आकर उन्हें करीब 6.50 लाख रुपये जमा करने पड़े। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। संदिग्ध खातों का विवरण बैंक से मांगा गया है।
चित्रांश ने बताया कि उन्होंने 11 मई 2025 को एक लोन एप डाउनलोड कर पांच हजार रुपये का लोन लिया था। कुछ दिनों बाद एप की ओर से 3,487 रुपये की मांग आई, जिसे उन्होंने अपने रुपये से चुका दिया। इसके बाद बार-बार छोटी-छोटी मांगों के बहाने लोन चुकाने के नाम पर उन्हें अलग-अलग खातों में रुपये जमा कराने पड़े।
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चित्रांश ने बताया कि जब वह एप डाउनलोड कर रहे थे तो एप को उनके फोन के कॉन्टैक्ट नंबर और गैलरी का एक्सेस भी दे दिया गया था। आरोप है कि इसी डेटा का दुरुपयोग कर जालसाज उनकी तस्वीरों को संपादित कर परिवार की अश्लील तस्वीरें बनाकर वायरल करने की धमकी देने लगे। फोन पर कॉल कर मिले एजेंट ने कहा कि अगर समय पर रुपये नहीं दिए तो पूरे परिवार की अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया और परिचितों के व्हाट्सएप पर भेज दी जाएंगी। इन धमकियों व ब्लैकमेल के डर से चित्रांश ने 11 मई से 21 अगस्त 2025 के बीच अलग-अलग खातों में कुल लगभग 6.50 लाख रुपये जमा कर दिए।
चित्रांश के अनुसार, रुपये जमा कराने के बाद भी ठगी थमी नहीं और जालसाज बार-बार नई मांगें करते रहे। परेशान होकर उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की और स्थानीय साइबर थाना में केस दर्ज कराया।

कोट
मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। संदिग्ध बैंक खातों का विवरण बैंक से मांगा गया है। डिजिटल ट्रेसिंग कर जालसाजों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
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- सुधीर जायसवाल, एसपी क्राइम

अपील ..
एसपी क्राइम ने लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की और कहा कि अनजान एप डाउनलोड करते समय संवेदनशील अनुमति (गैलरी, कॉन्टैक्ट) न दी जाएं। किसी भी संदिग्ध कॉल अथवा मैसेज की सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए।

बचाव ..
- किसी अनजान शख्स को निजी जानकारी, बैंक-OTP, फोन की गैलरी या संपर्क सूची का एक्सेस न दें।
- किसी भी ब्लैकमेल या धमकी की स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम थाने या पुलिस को सूचित करें।
- डिजिटल सबूत (कॉल-लॉग, मैसेज, ट्रांजेक्शन) सुरक्षित रखें।
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