खाद्य सुरक्षा विभाग ने बुधवार को शहर के तीन शॉपिंग मार्ट से लिए हल्दी के नमूने
एक साल में हल्दी के करीब 45 नमूने हो चुके हैं फेल
गोरखपुर। हल्दी को आयुर्वेद में दवा माना गया है। इसके प्रयोग से खाने की रंगत और पौष्टिकता बढ़ जाती है। लेकिन, धंधेबाजों ने इसे भी नहीं बख्शा। एक साल में हल्दी के 45 नमूनों की जांच हुई, जिसमें लेड क्रोमेट पाया गया। इसे ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने अब हल्दी की जांच के लिए अभियान शुरू किया है। बुधवार को तीन नमूने लिए गए, जिसमें दो नमूने हल्दी पाउडर और एक खड़ी हल्दी का है।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज रोड स्थित ए टू जेड मार्ट से खड़ी हल्दी और मोर रिटेल प्राइवेट लिमिटेड खजांची चौक व दिव्या इंटरप्राइजेज पादरी बाजार से संजोली ब्रांड के हल्दी पाउडर का नमूना लिया गया।
एक साल में जिले भर से हल्दी व हल्दी पाउडर के करीब 45 नमूनों की जांच में लेड क्रोमेट मिल चुका है। लेड क्रोमेट पीले रंग का केमिकल होता है, जो सीसा (लेड) और क्रोमियम से बना होता है। इसका उपयोग रंग बनाने में भी होता है। विभागीय जानकार बताते हैं कि कच्ची हल्दी को रंगने में इस केमिकल का प्रयोग किया जाता है, जिस वजह से हल्दी की शुद्धता प्रभावित हो रही है।