Gorakhpur PAC women recruits ruckus: बीते 23 जुलाई को ट्रेनिंग सेंटर में अव्यवस्था व अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाकर महिला रिक्रूट्स ने पीएसी गेट के बाहर हंगामा किया था। पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी पीएसी अरुण कुमार श्रीवास्तव को जांच सौंपी थी। प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर आरटीसी प्रभारी संजय राय और सेनानायक आनंद कुमार को निलंबित कर दिया गया था।
Gorakhpur PAC women recruits ruckus: 26वीं वाहिनी पीएसी के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (आरटीसी) में अव्यवस्था के विरोध में महिला रिक्रूट्स के हंगामे के मामले की विभागीय जांच पूरी हो गई है। इसमें तत्कालीन आरटीसी प्रभारी संजय राय लापरवाही बरतने के दोषी पाए गए हैं। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ परिनिंदा (अनुशासनहीनता और लापरवाही) का आरोप तय कर दंड का सुझाव दिया है।
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प्रदर्शन करते प्रशिक्षु
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं, तत्कालीन डीआईजी रोहन पी कनय और सेनानायक आनंद कुमार के खिलाफ शासन स्तर से जांच चल रही है। जांच अधिकारी जल्द ही अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। बीते 23 जुलाई को ट्रेनिंग सेंटर में अव्यवस्था व अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाकर महिला रिक्रूट्स ने पीएसी गेट के बाहर हंगामा किया था।
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प्रदर्शन करते प्रशिक्षु
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी पीएसी अरुण कुमार श्रीवास्तव को जांच सौंपी थी। प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर आरटीसी प्रभारी संजय राय और सेनानायक आनंद कुमार को निलंबित कर दिया गया था। इसी दिन देर शाम शासन ने पीटीएस के डीआईजी रोहन पी कनय को भी हटाते हुए उनके विरुद्ध भी जांच बैठा दी थी।
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प्रदर्शन करते प्रशिक्षु
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोप है कि उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पत्र भेजकर सभी महिला रिक्रूट्स की प्रेग्नेंसी जांच कराने को कहा था। इसके बाद से तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई। राजपत्रित अधिकारी होने के चलते डीआईजी रोहन पी कनय और तत्कालीन सेनानायक आनंद कुमार की विभागीय जांच शासन स्तर से की जा रही है।
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उल्टी करते ट्रेनी प्रशिक्षु
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं आरटीसी प्रभारी की जांच स्थानीय स्तर से की जा रही थी। आरटीसी प्रभारी के खिलाफ चल रही जांच पूरी हो गई है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है। पीएसी सूत्रों के अनुसार, जांच अधिकारी ने तत्कालीन आरटीसी प्रभारी को लापरवाही बरतने, महिला रिक्रूट्स के साथ अभद्र व्यवहार करने और अधिकारियों को सूचना न देने के आरोप में दोषी जाए जाने पर परिनिंदा प्रविष्टि से दंडित करने का सुझाव दिया है।
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अस्पताल में भर्ती ट्रेनी सिपाही
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
क्या होती है परिनिंदा
पुलिस नियमावली के अनुसार, परिनिंदा एक तरह से अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है। इसे पुलिस सर्विस बुक में दर्ज किया जाता है। परिनिंदा के अंतर्गत किसी पुलिस अधिकारी पर कदाचार और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए जाते हैं। पुलिस अधिकारी को उसकी गलती पर सार्वजनिक रूप से डांटना और उसे सुधार का मौका देना होता है।
आरटीसी प्रभारी के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पूरी हो गई है। इसमें आरटीसी प्रभारी दोषी पाए गए हैं। वहीं राजपत्रित अधिकारी होने के चलते सेनानायक समेत अन्य अधिकारियों की जांच शासन स्तर की जा रही है:डॉ. प्रीतिंदर सिंह, आईजी पीएसी, मध्य जोन