गोला ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सोढ़ावीर की छत हो चुकी है जर्जर
अधिकारियों को भी है जानकारी पर सबने किया है नजरअंदाज
गोला। राजस्थान के झालवाड़ा में स्कूल भवन के गिरने से मलबे में दबकर कई बच्चों की जान चली गई। केंद्र सरकार के स्तर से पूरे देश में सुरक्षा के मानक के ऑडिट का निर्देश जारी किया गया है। लेकिन राजस्थान जैसी घटना से यहां भी इनकार नहीं किया जा सकता है। जिले में करीब 50 स्कूलों के भवन जर्जर हैं। कहीं दीवारों में दरार है, तो कहीं छत से पानी टपकता है और कभी-कभी प्लास्टर टूटकर गिरता है। खतरे को देख बीएसए ने जर्जर स्कूलों में पढ़ाई न कराने के निर्देश दिए हैं, बावजूद इसके पढ़ाई बंद नहीं हुई है।
गोला ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सोढ़ावीर की छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह सरिया दिखाई दे रहा है। छत से कई जगह प्लास्टर टूटकर गिर गया है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है। डर के बीच बच्चे यहां पढ़ने को मजबूर हैं। भारी बारिश होने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। स्कूल प्रिंसिपल की ओर से प्रशासनिक अधिकारियों को भी इससे अवगत कराया गया है लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया है।
1995 में हुआ था निर्माण
प्राथमिक विद्यालय सोढ़ावीर का निर्माण वर्ष 1995 में बेसिक शिक्षा परिषद ने कराया था। वर्तमान में यहां 51 विद्यार्थी पढ़ रहें हैं। मिड डे मिल नियमित बनाया जा रहा है। विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाध्यापक पूजा सोनकर हैं जो इन दिनों मातृत्व अवकाश पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में अध्यापक कौशल कुमार शिक्षण कार्य देख रहे हैं।
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कोट
स्कूल की छत जर्जर हो चुकी है। बारिश में छत भी टपकटी है। इससे खतरा बना रहता है। इस समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
उदयशंकर राय, खंड शिक्षा अधिकारी गोला
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स्कूल जर्जर हालत में है, यहां छात्रों का पढ़ना खतरे से खाली नहीं है। इसकी मरम्मत कराकर ही इसमें पठन-पाठन कार्य कराना चाहिए।
गुलाब मौर्य, स्थानीय नागरिक
स्कूल की छत जर्जर हो चुकी है। लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं। जिम्मेदारों को जल्द से जल्द छत की मरम्मत कराकर पढ़ाई शुरू करानी चाहिए।जोखन प्रसाद, स्थानीय नागरिक