आरएसएस की ओर से शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन का किया गया आयोजन
गोरखपुर। संघ साधना के 100 वर्ष के अवसर पर विजयादशमी उत्सव के अंतर्गत रविवार को विंध्यवासिनी पार्क में शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभाग प्रचारक अजय नारायण ने कहा कि संघ की स्थापना समाज में समरसता और सामर्थ्यवान बनाने के लिए की गई।
संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण है, जिसपर संघ 100 वर्षों से कार्य कर रहा। संघ की स्वीकार्यता पूरे देश समाज में बढ़ी और आज आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा संगठन है। त्याग, समर्पण, सेवा और अनुशासन के साथ संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। संघ साधना के शताब्दी वर्ष में हम सबका कर्तव्य है कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मूर्त रूप दें।
कहा कि विजयादशमी शक्ति और संयम का पर्व है। भगवान राम का जीवन सामाजिक समरसता का संदेश देता है। भगवान राम ने रावण का वध कर आसुरी शक्तियों का विनाश किया था।असत्य पर सत्य के विजय के पर्व के रूप में मनाए जाने वाले विजयादशमी उत्सव को ही डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष में पांच विषय सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य पर कार्य कर रहा है।
इसके बाद स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन निकाला। स्वयंसेवकों का अनुशासित पथ संचलन जब नगर मार्गों से गुजरा तो वातावरण “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के उद्घोषों से गूंज उठा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से नगर संघ चालक प्रोफेसर राजेश सिंह, डॉ. रामनाथ गुप्त, डॉ. अमित सिंह, नगर कार्यवाह राजकुमार, डॉ. दिलीप मणि त्रिपाठी, डॉ. आरए अग्रवाल, डॉ. आरपी शुक्ला, डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. वाई सिंह, डॉ. दिनेश चंद्रा, डॉ. जेपी जायसवाल, डॉ रणजीत सिंह, डॉ. पीसी शाही, डॉ. एमके गुप्ता, डॉ. मनमोहन बरनवाल, डॉ. वीपी बरनवाल, एनएमओ से डॉ. पीएन सिंह, डॉ. अमित राय, डॉ. अश्वनी चौधरी, डॉ. अखिलेश्वर, डॉ. नमन, डॉ. रत्नेश तिवारी, प्रेम प्रकाश गिरि, डॉ. बीके गुप्ता आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।