चौथी मुहर्रम का रवायती जुलूस बसंतपुर से निकाला गया
कमा और जंजीर से किया मातम
गोरखपुर। मुहर्रम का मातमी जुलूस बसंतपुर स्थित दिवंगत मोहम्मद मेहंदी एडवोकेट के घर से दिन में दो बजे निकाला गया। इसमें अंजुमन हुसैनिया के बच्चों, नौजवानों के साथ बुजुर्गों ने हाथ, कमा (छुरियों), चाकू से सीने, माथे और पीठ पर मातम किया। इस दौरान या हुसैन, या हुसैन..., की सदा लगा रहे थे, जिससे पूरी फिजा गूंज उठी। इमाम हुसैन की याद में पूरा माहौल गमगीन था।
रफत हुसैन और मोहम्मद जहीर मेहंदी (बबलू) की सरपरस्ती में निकाले गए जुलूस की शुरुआत हल्सीगंज से हुई। घंटाघर, रेती के रास्ते होते हुए गीता प्रेस के पास इमामबाड़ा रानी अशरफुन निसा खानम पर जुलूस समाप्त हुआ। जुलूस में प्रत्येक धर्म और मजहब के लोगों ने भारी संख्या में शिरकत की। इस मौके पर वक्ताओं ने बताया कि इमाम हुसैन का बलिदान हमें सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस जुलूस के माध्यम से हम उनके साहस और समर्पण को याद करते हैं।
संरक्षक एडवोकेट एजाज रिजवी ने बताया कि इमाम हुसैन ने इराक स्थित कर्बला में बलिदान देकर स्पष्ट संदेश दिया कि जुल्म के खिलाफ हमेशा आवाज उठाना चाहिए और अगर आप हक पर हैं तो जालिम से डरना नहीं चाहिए। इमाम हुसैन की कुर्बानी नाइंसाफी को खत्म करने के लिए थी, इसीलिए हर साल मुहर्रम में इस कुर्बानी की याद सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि हर वह इंसान करता है जो इंसाफ पसंद है। जुलूस में जनाब सिब्ते रिजवी, मिर्जा अली, मिर्जा हुसैन, मिर्जा मेहंदी हसन (आमिश), आगा हसन मोहम्मद, आगा शानदार हुसैन आदि उपस्थित थे।