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Gorakhpur News: नहीं मान रहे धंधेबाज..फिर पकड़ा गया मिलावटी पनीर

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पाउडर-रिफाइंड से बना रहे थे पनीर, दो क्विंटल नष्ट कराया
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गोपालपुर सियारामपुर गांव में चल रहे कारखाने पर मारा छापा
खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतर जनपदीय टीम ने की कार्रवाई

दो दिन पहले भी पिपराइच इलाके में पकड़ा गया था पनीर बनाने का अवैध कारखाना
गोरखपुर। जिले में रिफाइंड और केमिकल से पनीर बनाने का धंधा रुक नहीं रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतर जनपदीय टीम ने सोमवार को गोपालपुर सियारामपुर गांव स्थित अमृत डेयरी पर छापा मारकर दो क्विंटल खराब पनीर को नष्ट कराया। यहां पनीर और दही का नमूना भी जांच के लिए लिया गया। इस डेयरी के लाइसेंस को निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तीन दिन पहले ही पिपराइच क्षेत्र में भी सहालग में खपाने के लिए तैयार चार क्विंटल खराब पनीर को नष्ट कराया गया था।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर में बिक रहे मिलावटी पनीर की छानबीन शुरू की तो पता लगा कि शहर में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पनीर आ रहा है। यह पनीर दुकानदारों को 150 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से मिल जा रहा है, जबकि इसकी बिक्री 280 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव तक हो जा रही है। लगभग दो गुना मुनाफा की वजह से ही दुकानदार इस मिलावटी पनीर को अधिक तवज्जो दे रहे हैं। दुकानदारों के जरिए ही खाद्य सुरक्षा विभाग को यह खबर लगी कि गोपालपुर-सियारामपुर गांव में एक डेयरी प्रोडक्ट बनाने वाली फर्म में हर दिन बड़ी मात्रा में पनीर तैयार हो रहा है, जो गोरखपुर शहर के अलावा पड़ोसी जिला कुशीनगर और महराजगंज भी जा रहा है।
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सोमवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतर जनपदीय टीम ने इस अमृत डेयरी पर छापा मारा। यहां करीब दो क्विंटल तैयार पनीर मिला। इसके अलावा मौके पर रिफाइंड ऑयल, मिल्क पाउडर, सैक्रीन और केमिकल सेफोलाइट व डेयरी व्हाइटनर आदि भी मिले। वहां पूछताछ में पता लगा कि इन पाउडर व केमिकल के इस्तेमाल से ही पनीर बनाया जाता है। इसके बाद टीम ने स्टोर में मिले दो क्विंटल पनीर को नष्ट करा दिया और सामान जब्त कर लिया। देर शाम डेयरी को नोटिस भेजने के साथ ही लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
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धर्मशाला इलाके का एक पनीर विक्रेता करता है संचालन
टीम ने छानबीन की तो पता लगा कि इस फर्म का पंजीकरण किसी राकेश कुमार शुक्ला पुत्र राम बहादुर के नाम है। लेकिन, वह इसका संचालन नहीं करते हैं। इस फर्म का असल संचालक गोरखपुर शहर के धर्मशाला इलाके का एक पनीर विक्रेता है। उसने भी इसे खुद के बजाय अपने एक रिश्तेदार के जरिए संचालित कराना शुरू किया था। करीब दो महीने पहले ही फर्म का पंजीकरण कराते हुए डेयरी प्रोडक्ट की पैकिंग व बिक्री आदि की जानकारी दी गई थी। बताया जा रहा है कि इस कारखाने में तैयार पनीर को आसपास के बाजारों में ही खपाया जाता था। इसके बाद अलावा शहर में भी सप्लाई होती थी। इधर, सहालग की वजह से गांवों में खपत अधिक हो रही थी।

व्हाइटनर से सफेद दिखता है पनीर
तीन दिन पहले पिपराइच क्षेत्र में पकड़े गए मिलावटी पनीर का मामला हो या फिर सोमवार को पकड़े गए पनीर का। दोनों ही जगह पनीर बनाने के लिए दूध के बजाय पाउडर व केमिकल का ही प्रयोग हो रहा था। जांच करने पहुंची खाद्य सुरक्षा टीम को मौके पर सैकरीन, सेफोलाइट व डेयरी व्हाइटनर मिला। डेयरी व्हाइटनर एक प्रकार का लिक्विड है। मिल्क पाउडर में रिफाइंड का इस्तेमाल करने पर पनीर का रंग हल्का पीला हो जाता है। इसे सफेद बनाने के लिए इसमें डेयरी व्हाइटनर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा सैकरीन के इस्तेमाल से पनीर में हल्की मिठास बनी रहती है।

तीन दिन पहले पिपराइच क्षेत्र में पकड़ा गया था कारखाना
गोरखपुर। पिपराइच क्षेत्र के बरईपार गांव में सहालग में खपाने के लिए बनाए गए चार क्विंटल पनीर को खाद्य सुरक्षा विभाग की अंतर जनपदीय टीम ने बीते शुक्रवार को नष्ट कराया था। वहां काफी गंदगी मिली थी। पनीर जिस ड्रम में रखे थे, उसमें मक्खियां मरी थीं और पानी से भी बदबू आ रही थी। इसलिए कारखाना को भी बंद करा दिया गया था। मौके पर मिले 103 लीटर रिफाइंड पामोलिन तेल और 50 किलो मिल्क पाउडर को सीज किया गया था। बता दें कि, साल भर में पनीर के 50 से अधिक नमूनों में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है। दो महीने पहले ही शहर की विभिन्न दुकानों से लिए गए पनीर के आठ नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई थी।
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कोट
अंतर जनपदीय टीम ने अमृत डेयरी पर छापा मारकर वहां मिले दो क्विंटल पनीर को नष्ट कराया। मौके से बड़ी मात्रा में केमिकल व पाउडर के डिब्बे भी मिले हैं। जानकारी मिली है कि पाउडर और केमिकल के इस्तेमाल से पनीर बनाया जा रहा था, जिसे शहर के अलावा पड़ोसी जिलों में खपाया जाता था। इस डेयरी का लाइसेंस निलंबित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य-2
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