ओडिशा की इकलौती टीम ने डेढ़ साल की मेहनत के बाद तैयार किया रॉकेट/कैनसैट
देशभर से 600 छात्र-छात्राओं ने प्रतियोगिता में किया है प्रतिभाग
गोरखपुर। कुशीनगर में इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री-कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता में देशभर से करीब 600 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया है। अलग-अलग कॉलेजों की टीमें यहां अपने रॉकेट-कैनसैट को लॉन्च कर रही हैं। ओडिशा के बुर्ला स्थित वीर सुरेंद्र साईं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीएसएसयूटी) की टीम भी प्रतिभाग कर रही है। टीम ने अपने रॉकेट की टेस्टिंग इसरो के इनोवेशन सेंटर में की थी। इसके बाद कुशीनगर स्थित नारायणी नदी के किनारे बुधवार को इसे लॉन्च किया।
कैनसैट टीम लीडर और बीटेक आईटी अंतिम वर्ष के छात्र ज्योति रंजन साहू ने बताया कि उनकी टीम में आठ सदस्य हैं। जनवरी 2024 में इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। पहले दो राउंड में डिजाइन और टेस्टिंग के बाद यहां ग्रैंड फिनाले में आने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि यह कैनसैट तापमान, दाब, जीपीएस, हवा का वेग आदि बता सकता है।
ज्योति रंजन ने बताया कि उनके कैनसैट की यह खासियत है कि यह कार्बन के फाइबर से बना है। यह हल्का और मजबूत होता है। इससे लॉन्च और लैंडिंग में परेशानी नहीं होती। विश्वविद्यालय परिसर में इसरो के सहयोग से स्थापित वीर सुरेंद्र साई अंतरिक्ष नवाचार केंद्र (वीएसएसएसआईसी) में दिसंबर 2024 में इसकी सफल टेस्टिंग की गई थी।
कुशीनगर का नाम अब अंतरिक्ष शिक्षा और नवाचार के मानचित्र पर दर्ज
उत्तर भारत में पहली बार हो रहा इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता का आयोजन
गोरखपुर। कुशीनगर अब अंतरिक्ष शिक्षा और नवाचार के मानचित्र पर अपनी पहचान दर्ज करा चुका है। उत्तर भारत में पहली बार यहां इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। नारायणी नदी किनारे आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से आए छात्र-छात्राएं अपने बनाए मॉडल रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं। यह मॉडल रॉकेट और कैनसैट एक किलोमीटर तक की ऊंचाई तक पहुंच रहे हैं।
प्रतियोगिता में आए विशेषज्ञों का कहना है कि नारायणी नदी का किनारा इस आयोजन के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान साबित हुआ है। यहां खुला और सुरक्षित क्षेत्र उपलब्ध है, जहां आबादी कम होने के कारण रॉकेट लॉन्च के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन आसानी से किया जा सका। रॉकेट लॉन्च के लिए एक नो-फ्लाई जोन और सेफ जोन की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि नदी किनारा ऐसा क्षेत्र होता है जहां स्वाभाविक रूप से बड़ी खुली जगह मिल जाती है ताकि प्रतिभागियों और दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। छोटे या शैक्षणिक स्तर के रॉकेट (जैसे एक किमी ऊंचाई तक) के लिए वायुमंडलीय स्थितियां यहां स्थिर रहती हैं। आसपास ऊंचे पेड़-पहाड़ या इमारतें न होने के कारण रॉकेट की ट्रैजेक्टरी में रुकावट नहीं आती। अगर किसी कारण से रॉकेट का मलबा या पैराशूट नदी या रेत वाले तट पर गिरता है तो उससे नुकसान की आशंका बहुत कम रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाका अपेक्षाकृत शांत और प्राकृतिक है, जिससे छात्रों को वास्तविक फील्ड लॉन्च का अनुभव मिलता है। पर्यावरण पर भी न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। छठ महापर्व की वजह से मंगलवार को लॉन्च में थोड़ी देर हुई।
स्वदेशी साउंडिंग रॉकेट बनाने वाला पहला छात्र समूह
ओडिशा के इसी संस्थान के छात्रों ने देश में पहली बार स्वदेशी साउंडिंग रॉकेट का निर्माण और सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया था। टीम के सदस्य संदीप कुमार आईपी ने कहा कि पिछड़े इलाके से आने के बाद भी ओडिशा के छात्र स्पेस साइंस में काफी अच्छा काम कर रहे हैं। इसरो के इनोवेशन सेंटर की मदद से वहां पर अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। मॉडल रॉकेट और कैनसैट बनाकर छात्रों के इस ग्रुप ने संस्थान की परंपरा को आगे बढ़ाया है।
इसे कहते हैं कैनसैट
कैनसैट एक छोटा शैक्षिक उपग्रह मॉडल है, इसका आकार लगभग एक सोडा कैन जितना होता है। इसे छात्रों को उपग्रह डिजाइन और अंतरिक्ष मिशन की मूल अवधारणाओं का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए विकसित किया गया है। छोटे मॉडल रॉकेट से लगभग एक किलोमीटर की ऊंचाई तक भेजे जाने के बाद यह पैराशूट की मदद से नीचे उतरते हुए तापमान, दबाव, ऊंचाई और जीपीएस डेटा जैसी जानकारियां एकत्र करता है।
प्रतियोगिता से स्पेस टेक्नोलॉजी, एयरोडायनेमिक्स और रिसर्च में होगी वृद्धि
गोरखपुर। उत्तर भारत में पहली बार आयोजित हो रही इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता ने अंतरिक्ष शिक्षा और नवाचार को नई दिशा दी है। प्रतियोगिता के दौरान 70 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए जा रहे हैं, जो एक किलोमीटर तक की ऊंचाई तक पहुंचे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतियोगिता केवल एक आयोजन नहीं बल्कि भविष्य के वैज्ञानिकों की प्रयोगशाला है। इसमें छात्रों को रॉकेट निर्माण, संतुलन, प्रक्षेपण और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। यह पहल देश में स्पेस टेक्नोलॉजी, एयरोडायनेमिक्स और रिसर्च के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करेगी। छात्रों की ओर से तैयार किए गए रॉकेटों में ऊंचाई, तापमान, दबाव और वायु गति मापने वाले सेंसर लगाए गए हैं। लॉन्चिंग के बाद प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण छात्रों को अनुसंधान और नवाचार की गहराई से समझ विकसित करने में मदद करेगा। सफल लॉन्च के बाद इन रॉकेटों की क्षमता बढ़ाकर उन्हें अधिक ऊंचाई पर भी भेजा जा सकता है।
इन-स्पेस से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में ऐसे आयोजनों से युवाओं की वैज्ञानिक सोच और तकनीकी कौशल का विकास होगा। जब देश में युवा वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ेगी तो भारत स्पेस साइंस में आत्मनिर्भर बनेगा और अन्य देशों को भी मार्गदर्शन देने की स्थिति में होगा।
चौराहों पर चर्चा...आज कितने रॉकेट लॉन्च हुए
इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता को लेकर लोगों में उत्साह
गोरखपुर। नारायणी नदी किनारे आयोजित इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता ने न सिर्फ छात्रों में जोश भर दिया है बल्कि आम लोगों में भी जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। आयोजन को देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आसमान में उड़ते रॉकेटों का नजारा देखने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भीड़ उमड़ रही है।
लॉन्चिंग के दौरान जैसे ही रॉकेट आकाश की ओर उड़ान भरता है, लोगों में रोमांच का माहौल बन जाता है। कई दर्शक अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में प्रतियोगिता की चर्चा हो रही है। चौराहों और बाजारों में लोग पूछते नजर आते हैं कि आज कितने रॉकेट लॉन्च हुए।
यह प्रतियोगिता उत्तर भारत में पहली बार आयोजित की जा रही है। देशभर से आए करीब 600 छात्र–छात्राएं इसमें भाग ले रहे हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए 70 मॉडल रॉकेट एक किलोमीटर तक की ऊंचाई तक उड़ान भर रहे हैं। आयोजन स्थल पर पहुंचे राकेश रंजन का कहना है कि उन्होंने पहली बार रॉकेट लॉन्चिंग जैसी तकनीकी गतिविधि देखी है। उन्हें गर्व है कि कुशीनगर अब अंतरिक्ष नवाचार और शिक्षा का नया केंद्र बन रहा है। पिपराघाट के अभिषेक सिंह ने कहा कि आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। इसे लेकर बच्चों से लेकर बड़ों तक में उत्साह है।
बच्चों में भी जोश... अब हम भी बनाएंगे रॉकेट
इन-स्पेस प्रतियोगिता ने जिले में जगाई अंतरिक्ष विज्ञान की ललक
गोरखपुर। आसमान में रॉकेट के उड़ते ही नारायणी नदी किनारे तालियों और उत्साह की गूंज फैल जाती है। इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता ने जिले के लोगों में नया जोश भर दिया है। स्थानीय लोग और बच्चे भी प्रतियोगिता को देखकर रोमांचित हो रहे हैं।
विभिन्न स्कूलों से आए बच्चे इस इवेंट को देख रहे हैं। रॉकेट लॉन्च देखकर उनमें भी अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर रुचि बढ़ी है। बच्चों का कहना है कि अब वह भी रॉकेट बनाएंगे। जीरो बंधा पर पहुंचे कक्षा आठ के छात्र अंकित ने बताया कि उसने अब तक किताबों में ही रॉकेट और स्पेस साइंस के बारे में पढ़ा था। आज सामने से इसका परीक्षण देख लिया। अब जिज्ञासा हो रही है कि इस फील्ड में अपना कॅरिअर बनाएं। कक्षा नौवीं के छात्र मुकुल ने बताया कि गांव में अब तक लोग सरकारी नौकरी और बिजनेस को ही तरजीह देते हैं। रिसर्च के क्षेत्र में अब तक कोई नहीं गया। उसने बताया कि उसके अंदर अंतरिक्ष विज्ञान की ललक है। वह गांव से पहला वैज्ञानिक बनेगा।