थोक में 30 से 60 व फुटकर में 70 से 80 रुपये किलो बिक रहा देसी लहसुन
पिछले साल रेट अधिक होने पर दुकानदारों ने भी कम कर दिया था प्रयोग
गोरखपुर। नॉनवेज के अलावा छोला में लहसुन की गांठ का मजा लेने के लिए अच्छी खबर है। महेवा मंडी में आवक ज्यादा होने से इस बार देसी लहसुन का दाम थोक में 50 रुपये प्रति किलोग्राम से भी नीचे आ गया है। इसका असर यह है कि दुकानदार फिर छोला और नॉनवेज में लहसुन की गांठ डालने लगे हैं। घर की रसोई में भी लहसुन की महक बढ़ी है।
गोरखपुर-बस्ती मंडल में लहसुन की खपत अधिक है। अकेले महेवा मंडी में हर दिन करीब 40 टन लहसुन की खपत है। खाने के शौकीन आशुतोष पांडेय बताते हैं कि फोरलेन के कोनी चौराहा और चौरीचौरा तक लोग लहसुन की गांठ वाला चने का छोला खाने जाते हैं। इसके अलावा नॉनवेज की थाली में लहसुन की गांठ न हो, तब तक उसका स्वाद नहीं बढ़ता। हालांकि, यह लहसुन पिछले साल थाली से लगभग गायब ही हो गया था। मोहद्दीपुर में कैंटीन चलाने वाले शिवशंकर कहते हैं कि नॉनवेज खाने वाले लहसुन की गांठ जरूर मांगते हैं। पिछले साल रेट 280 से 300 रुपये किलो होने की वजह से गांठ डालना संभव नहीं हो पाता था। लेकिन अब रेट गिरा है तो हर प्लेट में एक गांठ जरूर दे रहे हैं। फुटकर में 80 रुपये किलो तक लहसुन मिल जा रहा है।
तेजी से कम हो रहा है थोक और फुटकर में दाम
महेवा मंडी में थोक में देसी लहसुन लगभग 30 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। जिसे आसपास के जिलों के व्यापारी फुटकर में बेचने के लिए ले जा रहे हैं। दाम कम होने के कारण फुटकर बाजार में भी दाम में गिरावट हुई है। फुटकर बाजार में देसी लहसुन 70 से 80 रुपये किलो के भाव मिल रहा है। देसी लहसुन के दाम गिर जाने के कारण चीन के लहसुन को बाजार में जगह नहीं मिल रही है। महेवा मंडी के लहसुन व्यापारी साजिद अली ने बताया कि इस समय लहसुन की आवक अधिक है। 40 टन लहसुन प्रतिदिन मंडी में आ रहा है। यह आसपास के जिलों में भी भेजा जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि लहसुन के निर्यात पर रोक लगने से बाजार में आवक बढ़ी है। थोक व्यापारी अनिल मौर्य ने बताया कि पिछले साल थो में लहसुन150 से 250 रुपये किलो बिक रहा था।-