एम्स में मिला सीपीआर और बीएलएस का प्रशिक्षण
छात्रों, स्टाफ और आम नागरिकों को दी गई जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी
गोरखपुर। एम्स के बाल रोग विभाग ने छात्रों, चिकित्सा स्टाफ और आमजन को बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। इसका उद्देश्य लोगों को आपातकाल में जरूरी सहायता उपलब्ध कराकर उनके जीवन की रक्षा करना रहा।
एम्स ने इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के सहयोग से 18 से 21 जुलाई तक आईएपी सीपीआर दिवस के अंतर्गत चार दिवसीय जीवन रक्षक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसकी शुरुआत 18 जुलाई को एमबीबीएस छात्रों के लिए बीएलएस क्विज और सीपीआर गेमिफिकेशन से हुई। 19 जुलाई को आर्मी पब्लिक स्कूल में बच्चों के लिए मास अवेयरनेस सत्र आयोजित किया गया जिसमें प्राथमिक उपचार, सीपीआर के बुनियादी सिद्धांतों और आपातकालीन प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।
20 जुलाई को बाल रोग विभाग के इन-पेशेंट क्षेत्र में मॉक कोड ब्लू–इन सिटू सिमुलेशन हुआ जिसमें ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया। इस व्यावहारिक अभ्यास ने टीमवर्क, समय प्रबंधन और तत्काल चिकित्सा प्रतिक्रिया पर बल दिया।
21 जुलाई को समापन दिवस पर सुबह मरीजों के परिजनों और आगंतुकों के लिए सीपीआर जागरूकता सत्र और शाम को एम्स के सुरक्षा कर्मियों और हाउसकीपिंग स्टाफ को सीपीआर का वास्तविक प्रशिक्षण दिया गया।
बाल रोग विभाग की प्रमुख एवं डीन अकादमिक डॉ. महिमा मित्तल ने कहा कि समय पर सीपीआर का प्रयोग जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है। एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने इस पहल को अस्पताल की सामाजिक प्रतिबद्धता बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम समुदाय को सशक्त बनाते हैं। इस आयोजन ने चिकित्सा छात्रों से लेकर आम लोगों तक में जीवन रक्षक चेतना विकसित करने का कार्य किया, जिससे भविष्य में संकट के समय में कई जीवन बचाए जा सकेंगे।