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Gorakhpur News: खतरनाक साइबर हमला होता है रैनसमवेयर अटैक...डेटा रिकवर होना मुश्किल

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गोरखपुर में साइबर हमले का पहला केस दर्ज किया गया, विशेषज्ञ कर रहे जांच
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गोरखपुर। साइबर अपराध थाने में केस दर्ज करने के बाद हैकर का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की टीम लगाई गई है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार रैनसमवेयर अटैक एक खतरनाक साइबर हमला होता है। इसमें हैकर कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस का डेटा एन्क्रिप्ट कर देते हैं। उसे वापस देने के लिए फिरौती की मांग करते हैं। इसमें कभी फिरौती की रकम नहीं देनी चाहिए। ऐसे मामलों में डेटा रिकवर हो पाना बेहद ही मुश्किल है। पहली बार गोरखपुर में साइबर अटैक का केस दर्ज किया गया है।

साइबर विशेषज्ञ उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि तीन साल पहले एक इंजीनियर के लैपटाॅप में साइबर हमला कर उसके सारे डेटा को हैकर ने हैक कर लिया था। इस मामले में इंजीनियर ने केस नहीं दर्ज कराया था। उसने दोबारा फिर नया डेटा तैयार किया था। उस समय साइबर हमले को लेकर लोग बहुत जागरूक भी नहीं थे।
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कारोबारी बोले- डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकता है हैकर
कारोबारी संजय रामरायका ने बताया कि उनकी दोनों कंपनियां ऑयल व शुगर की खरीद-फरोख्त का काम करती हैं। सर्वर पर रैनसमवेयर अटैक हुआ है। इसके कारण कंपनी का पूरा डेटा करप्ट हो गया। 29 मई की सुबह कंपनी की आईटी टीम ने आंतरिक सर्वर सिस्टम में हैकर्स की इंट्री का पता लगाया। जांच करने पर पाया गया कि पूरे डेटा को करप्ट किया गया है। साइबर अपराधियों की ओर से एक फिरौती संदेश सर्वर पर छोड़ा गया है, जिसमें क्रिप्टो करेंसी में भुगतान की मांग की गई है। इसके बदले में वह डिक्रिप्शन कमांड (जिससे डाटा खुल जाएगा) देने को कहे हैं। कारोबारी का कहना है कि इस हमले के कारण कंपनी के सभी कामकाज प्रभावित हो गए हैं। साथ ही ये भी डर लग रहा है कि हैकर डेटा का गलत इस्तेमाल भी कर सकता है। इतने दिनों से कारोबार कर रहा हूं, इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है।
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रैनसमवेयर से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां


- सॉफ्टवेयर अपडेट रखें: अपने ऑपरेटिंग सिस्टम, एंटीवायरस और सभी एप्स को नियमित रूप से अपडेट करें। पुराने सॉफ्टवेयर में सुरक्षा खामियां होती हैं।

- एंटीवायरस और फायरवॉल का उपयोग करें : एक भरोसेमंद एंटीवायरस प्रोग्राम इंस्टॉल करें और उसका रियल-टाइम प्रोटेक्शन चालू रखें।
- बैकअप रखें: अपने महत्वपूर्ण डेटा का नियमित बैकअप लें, खासकर किसी बाहरी हार्ड ड्राइव या क्लाउड सर्विस पर जो इंटरनेट से कटा हुआ हो।
- संदिग्ध ईमेल और लिंक से सावधान रहें : अनजान ईमेल, अटैचमेंट, या लिंक पर कभी क्लिक न करें, भले ही वो किसी जान-पहचान वाले नाम से क्यों न हो।
- यूएसबी ड्राइव या डाउनलोड की गई फाइल्स को स्कैन करें : किसी भी बाहरी स्टोरेज डिवाइस या डाउनलोड की गई फाइल को ओपन करने से पहले स्कैन करें।
- रिमोट डेस्कटॉप प्रोटोकॉल (आरडीपी) को बंद करें: अगर आपको इसकी जरूरत नहीं है तो इसे बंद रखें, क्योंकि हैकर अक्सर इसके माध्यम से सिस्टम तक पहुंचते हैं।
- मजबूत पासवर्ड और 2-एफए का इस्तेमाल करें : हर अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखें और जहां संभव हो टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2-एफए) का प्रयोग करें।
- वीपीएन का उपयोग करें (विशेषकर पब्लिक वाई-फाई पर) : पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करते समय वीपीएन का उपयोग करें ताकि डेटा एन्क्रिप्ट रहे।



सिस्टम पर रैनसमवेयर अटैक हो जाए तो क्या करें

- फिरौती न दें, कोई गारंटी नहीं है कि आपका डेटा वापस मिलेगा।
- तुरंत साइबर क्राइम सेल या सीईआरटी को रिपोर्ट करें।
- इंटरनेट कनेक्शन डिस्कनेक्ट करें ताकि वायरस और न फैले।
- बैकअप से सिस्टम को री-इंस्टाल करें।
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