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Gorakhpur News: प्रधान को पकड़ने पुलिस टीम गुजरात रवाना, आरोपी ने मोबाइल किया स्वीच ऑफ

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गोला (गोरखपुर)। धौरहरा गांव के प्रधान रामेश्वर दुबे को पकड़ने पुलिस की टीम रविवार को गुजरात रवाना हो गई। सर्विलांस की मदद से पुलिस को गुजरात के किसी शहर की लोकेशन मिली है। इसके आधार पुलिस टीम गुजरात पुलिस से भी संपर्क कर चुकी है। प्रधान से भी पुलिस ने संपर्क करना चाहा लेकिन उसने मोबाइल स्वीच ऑफ कर लिया है। प्रधान गुजरात में ही कैटरिंग का व्यवसाय करता है। वहीं रविवार को विशेष कोर्ट में पेश कर प्रधान के दोनों भाई तारकेश्वर दुबे, परमेश्वर दुबे और पवन यादव को जेल भिजवा दिया। तीनों आरोपियों ने कई अहम जानकारियां पुलिस को दी है।
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धौरहरा गांव में रविवार को झिनकू दुबे के घर कुछ महिलाएं बाहर बैठ कर आपस में चर्चा कर रही थीं। वहीं मृतक के बेटे अन्य कार्य में व्यस्त थे। वहीं प्रधान रामेश्वर दुबे के घर पर ताला लटका हुआ था। बताया जा रहा है कि सुबह से ही प्रधान के भीड़ एकत्रित हो जाती थी। अब यहां सन्नाटा पसरा है। गांव में पुलिस गश्त कर रही है। ग्रामीण आपस में इस घटना को लेकर चर्चा करते दिखे। दबी जबान कई बातें सुनने को मिल रही हैं। घटना के बारे में पूछने पर कोई बोलने का तैयार नहीं है। मृतक के परिजनों ने बताया कि पुलिस घर पर आई थी। बहू गुड़िया का मेडिकल कराने के लिए अपने साथ ले गई है।

प्रधान बनने के बाद साथ रखने लगा मनबढ़
बताया जा रहा है कि रामेश्वर दुबे प्रधान बनने के बाद गोला इलाके के मनबढ़ लड़कों को साथ रखने लगा था। जो इसके कहने पर मारपीट करते हैं। सूत्रों की माने तो प्रधान खुद कभी हाथ नहीं उठाता है। मनबढ़ युवकों को भेजकर मारपीट कराता है।
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रुपयों की वजह से दूरी, पिता को पीटने पर बन गया दुश्मन
पुलिस टीम की जांच में सामने आया है कि झिनकू और प्रधान रामेश्वर के बीच रुपये को लेकर रार हुई। इसके बाद झिनकू पर हमला किया गया। फिर झिनकू ने प्रधान के पिता पर हमला कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच दुश्मनी और बढ़ गई। पिता के अपमान का बदला लेने के लिए प्रधान झिनकू को खोज रहा था।

तीन दिन से कर रहे थे रेकी
मृतक के दूसरे नंबर के पुत्र अभय दुबे ने बताया कि 19 नवंबर को हुई मारपीट की घटना के बाद से पिता डाड़ी में बुआ के घर रह रहे थे। वहां पर पिछले तीन दिन लगातार नजर रखी जा रही थी। घटना वाले दिन सुबह छह बजे निकले और मात्र दस मिनट में ही उन्हें घेर कर मार दिया गया। आरोप लगाया कि इस घटना में और लोग भी शामिल हो सकते हैं। जिन्होंने लोकेशन देने में मदद की है। छोटा भाई राहुल भी जब पुणे से मुंबई आ रहा था, तब भी कुछ लोग गाड़ी से लगातार पीछा कर रहे थे। डर सहमा भाई एयरपोर्ट के अंदर जब पहुंचा तब सुरक्षा का अहसास हुआ।
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