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Gorakhpur News: कैंपियरगंज तहसील में 10 साल से चल रहा था पेशकार का सिक्का

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पेशकार के साथ ही नाजिर की भी भूमिका निभाता था अरविंद
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एंटी करप्शन टीम के सामने छोड़ने के लिए लगाता रहा गुहार
गोरखपुर। एंटी करप्शन के हाथ आया पेशकार अरविंद कुमार श्रीवास्तव (45) 10 साल से एक ही तहसील में जमा हुआ था, इस वजह से उसका सिक्का चलता था। तहसील में पेशकार के साथ ही नाजिर का भी दायित्व उसकी के पास था। बताया जा रहा है कि अधिकारियों का शह भी उसे मिला हुआ था। आलम यह था कि इसके अनुमति के बिना एक भी काम किसी का तहसील से नहीं हो पाता था। इससे हर कोई परेशान था। रोज-रोज की आदत से तंग आकर पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। पकड़े जाने पर एंटी करप्शन टीम के सामने छोड़ने के लिए गुहार लगाता रहा।
सूत्रों की मानें तो कई अफसर आए गए लेकिन कोई अरविंद को इधर से उधर नहीं कर पाया। जो आया उसका मुरीद हो गया। कई बार तहसील में उसकी शिकायत पहुंची जो अंदर ही अंदर दब कर रह गई। पुराना होने के नाते अधिकारी भी कार्रवाई करने से बचते थे। इसने अपना अलग यूनियन भी बना लिया था। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सरकार से मिलने वाली सैलरी से कहीं बढ़ चढ़कर पेशकार ने संपत्ति बना ली थी। बताया जा रहा है कि अगर इसकी संपत्ति की जांच की जाए तो कई और भेद खुल सकते हैं। देवरिया के अलावा इसने गोरखपुर में भी कई जगह संपत्ति ले रखी है। इसके अलावा जमीन के धंधे में भी इसने रुपये लगाए हैं। देवरिया जिले के रुद्रपुर थाने के जोंकहा गांव में भी इसकी अच्छी खासी संपत्ति है।
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इससे पहले भी पकड़े गए हैं मामले
2024 नवंबर: पिपराइच थाने में तैनात प्रशिक्षु महिला दारोगा अंकिता पांडेय को एंटी करप्शन की टीम ने 10 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया। एक केस से नाम निकालने के लिए मां व बेटे से वह रुपये मांग रही थी।
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2024 अगस्त: खोराबार रामनगर चौकी पर तैनात आरक्षी मुहम्मद एनाम खान और आरक्षी सूरज सिंह को 10 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया। एक केस में दोनों पीड़ित से रुपये की मांग कर रहे थे।
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