बाढ़ पीड़ितों का छलका दर्द, बोले-दो दिन पहले प्रशासन से मिली थी राशन सामग्री
पानी के चलते जहरीले जीव आ गए आबादी की ओर, हर पल खतरा
चिल्लूपार। बड़हलगंज ब्लॉक क्षेत्र के बगहा देवार, ज्ञानकोल और जैतपुर गांव सरयू नदी की बाढ़ में टापू बन गए हैं। चारों तरफ से नदी से कटान हो रहा है। प्रभावित गांवों के पीड़ितों से जब बात की गई तो उनका दर्द छलक उठा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से निकलने के लिए नाव ही सहारा है। घर की सामग्री भी खत्म हो चुकी है। खाने के लाले पड़े हैं। जहरीले जीव पानी के चलते अब आबादी की ओर आ गए हैं, हर पल खतरा बना हुआ है। वहीं, बाढ़ से फसल बर्बाद हो गई है। जिसके चलते पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है।
ज्ञानकोल गांव के जयप्रकाश यादव ने बताया कि पूरा गांव टापू बन गया है। पशुओं और परिवार के साथ गांव में हैं। बाढ़ की वजह से जैसे-तैसे जीवन यापन कर रहे हैं। चारों तरफ पानी होने के नाते जहरीले जीव आबादी की ओर आ गए हैं। हमेशा डर बना रहता है। गांव से निकलने के लिए नाव ही सहारा है। सबसे अधिक समस्या पशुओं के चारे के लिए हो रही है। फसल डूब गई है। घर भी कटान के जद में हैं। अंदर ही अंदर कटान हो रहा है। वहीं, उदयभान यादव का कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत अब खाद्य सामग्री को लेकर हो रही है। प्रशासन की ओर से दो दिन पहले राशन सामग्री का पैकेट मिला था। किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
बाढ़ का पानी गांव के चारों तरफ फैल गया है। आज तक गांव में बिजली संबंधी कोई कार्य नहीं हुआ है। प्रशासन ने अपने हाल पर छोड़ दिया है। सुभाष का घर कट गया और आधा दर्जन लोगों के घर कटान के मुहाने पर हैं। अबतक किसी अधिकारी ने गांव का निरीक्षण तक नहीं किया। ग्राम पंचायत की नाव से ही आना-जाना मजबूरी है। कोई राहत सामग्री भी नहीं मिली है।
- बृजेश कुमार, जैतपुर
बाढ़ पीड़ितों के साथ प्रशासन भेदभाव कर रहा है। गांव में लगभग 65 घर के तीन सौ लोगों निवास करते हैं। गांव टापू बना है। बारह माह नाव से ही आते-जाते हैं। न तो सड़क है और न ही बिजली। कुछ लोगों को सोलर पैनल मिला है, उनके घर थोड़ा उजाला है बाकी लोग अंधेरे में जीवनयापन करते हैं। सामान भी खत्म हो गया है।
- राम भुआल साहनी, जैतपुर
मोबाइल टार्च जलाकर करते हैं रोशनी
बगहा देवार गाव में सड़क पर गड़रिया टोले के 85 छप्पर है। सुमन पाल कहती हैं, रात में उजाले के लिए जुगाड़ की बिजली जब चली जाती है तो रोशनी के लिए मोबाइल के टाॅर्च की रोशनी से आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। फूस के मकान में जहरीले जीव-जंतुओं का भय हमेशा बना रहता है। इस सबके आवास की आस में गुजर-बसर कर रहे हैं।
वर्जन
बगहा देवार के 85 कटान पीड़ित की समस्याएं प्रशासन के संज्ञान में है। वहां से रिपोर्ट मांगी गई थी। मैंने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दिया गया है। जिन कटान पीड़ितों की खेती योग्य जमीन, मकान और फसल का कटान में नुकसान होगा या हो गया होगा उन सभी को मुआवजा दिया जाएगा। संबंधित लेखपाल सर्वे कर रहे हैं। इस बार के कटान में जिस किसी का घर कटेगा उनकी सूची मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए विकास भवन भेजी जाएगी। लेखपाल को निर्देश दिया गया है कि सभी कटान पीड़ितों के नाम शामिल कर सूची उपलब्ध कराएं। - अमित कुमार जायसवाल, एसडीएम, गोला