रेल पटरियों पर संरक्षा के लिए काम के चलते अलग से नहीं लिया जाएगा ब्लाॅक
एनईआर में लिया गया निर्णय ताकि ट्रेनों का संचलन न हो प्रभावित
गोंडा-बुढवल रूट पर करनैलगंज-घाघराघाट के बीच इसी रणनीति पर हुआ काम
गोरखपुर। अब रेल पटरियों पर काम कराने के लिए मेगा ब्लॉक के साथ ही शैडो ब्लॉक लिया जाएगा। इस दौरान पॉइंट, सिग्नल और संरक्षा संबंधित छोटे काम कराए जाएंगे। इससे फायदा यह होगा कि अलग से ब्लॉक लेने की जरूरत नहीं होगी और ट्रेनों का संचलन प्रभावित नहीं होगा। पूर्वोत्तर रेलवे में अब यार्ड रिमॉडलिंग, नॉन इंटरलांकिंग कार्य के दौरान इसी प्रकार काम होगा। गोंडा-बुढवल रूट पर करनैलगंज-घाघराघाट के बीच इसी रणनीति को अपनाकर काम कराया गया।
इस समय तीसरी लाइन निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान सप्ताह भर तक मेगा ब्लॉक लेना पड़ता है और बहुत सारी ट्रेनें निरस्त हो जाती हैं। इससे यात्रियों को बहुत दिक्कतें होती हैं। जहां काम होता है वहां सिग्नल और पॉइंट के छोटे-छोटे काम भी होते हैं, जिसके लिए अलग से तीन से चार घंटे का ब्लॉक लेना पड़ता है। इस दौरान भी ट्रेनें निरस्त करनी पड़ती हैं। अब ऐसा नहीं होगा।
रेल प्रशासन ने तय किया है कि मेगा ब्लॉक के साथ ही शैडो ब्लॉक (संरक्षा कार्यों या अन्य रखरखाव कार्यों के लिए) भी लिया जाएगा। गोंडा-बुढ़वल रूट पर करनैलगंज-घाघरा घाट तीसरी लाइन निर्माण के अन्तर्गत नॉन इंटरलॉक कार्य के लिए तीन व चार जुलाई को मेगा ब्लॉक लिया गया था। इस दौरान शैडो ब्लॉक भी लिया गया और कार्य कराए गए।
इसके अंतर्गत पांच पॉइंट मशीन, 21 क्वाड केबल ज्वाइंट और पांच गेट बूम को बदला गया। गोरखपुर-गोंडा खंड पर 10 सीएमएस क्रासिंग की रिकंडिशनिंग की गई। दो क्राॅसिंग बदले गए। 46 रेल पटरियों की वेल्डिंग, 75 बीम स्लीपर को बदला गया। 360 ट्रैक मीटर रेल बदलने और दो किलोमीटर रेल पैनल बदलने का कार्य किया गया।
वर्जन
मुख्य रेलमार्ग गोरखपुर-लखनऊ रेलखंड पर गति सीमा बढ़ाने के लिए ट्रैक स्ट्रक्चर को अपग्रेड करने का कार्य जारी है। करनैलगंज-घाघराघाट तीसरी लाइन निर्माण के अन्तर्गत किए गए नॉन इंटरलॉक कार्य के दौरान शैडो ब्लॉक के अंतर्गत विभिन्न कार्य संपादित किए गए।
-पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर