भटहट इलाके के इन गांवों के किसान मुआवजे को लेकर जता रहे आपत्ति
भूमि अधिग्रहण नहीं होने से इन गांवों में शुरू नहीं हो पा रहा विकास कार्य
गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की बहुप्रतीक्षित ''''''''नया गोरखपुर योजना'''''''' अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। कुसम्ही क्षेत्र के तीन गांवों में अनिवार्य भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और अब उत्तर दिशा के बालापार, रहमतनगर और मानीराम गांवों में भी इसी प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी चल रही है।
प्रशासन का लक्ष्य है कि लगभग 400 एकड़ जमीन अनिवार्य अर्जन के माध्यम से ली जाए ताकि इस मेगा प्रोजेक्ट का विकास कार्य गति पकड़ सके। हालांकि, किसानों की असहमति इस योजना की राह में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जीडीए और राजस्व विभाग के अधिकारी अब तक तीन दौर की बातचीत किसानों से कर चुके हैं लेकिन आपसी सहमति नहीं बन सकी।
किसान लगातार मुआवजा दरों को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। उनका कहना है कि शहर के तेजी से फैलते दायरे और कनेक्टिविटी के कारण उनकी जमीनों की वास्तविक कीमत कहीं अधिक है, जबकि उन्हें पुराने सर्किल रेट पर मुआवजा दिया जा रहा है। आरोप है कि 2016 के बाद से सर्किल रेट में कोई संशोधन नहीं हुआ। इसके चलते वे अपनी जमीनें देने को तैयार नहीं हैं।
जीडीए ने कुशीनगर रोड पर भूमि अधिग्रहण से संबंधित सामाजिक प्रभाव आकलन की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसके बाद अब धारा 11 के तहत अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसी तरह उत्तर दिशा में बालापार, रहमतनगर और मानीराम गांवों में धारा 4 के तहत आपत्तियां मांगी जाएंगी। इन गांवों को ''''''''गुरुकुल सिटी'''''''' क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां आवासीय, शैक्षणिक और वाणिज्यिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
विरोध की आशंका
अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, किसान आंदोलन की आशंका भी बढ़ रही है। कुसम्ही क्षेत्र में पहले से विरोध कर रहे किसानों ने संकेत दिए हैं कि यदि उन्हें उचित दर पर मुआवजा नहीं मिला तो वे नए अधिग्रहण वाले क्षेत्रों में भी विरोध शुरू करेंगे। कई किसानों ने पहले ही न्यायालय की शरण ली है। उनका कहना है कि सरकार को बाजार दरों का वास्तविक मूल्यांकन कराकर चार गुना मुआवजा देना चाहिए। तकिया मेदिनीपुर के किसान संतोष गुप्ता का कहना है कि हमारी जमीन ही हमारा सब कुछ है। अगर जमीन चली जाएगी तो हमारा क्या होगा। रामगति यादव ने कहा कि प्रशासन और सरकार को हमारी भी सुननी चाहिए। जबरन अधिग्रहण नहीं होना चाहिए।
24 गांवों में फैली है यह योजना
जीडीए की ''''''''नया गोरखपुर योजना'''''''' लगभग 24 गांवों को कवर करती है। इनमें से आधे गांव कुशीनगर मार्ग पर और शेष बालापार क्षेत्र में स्थित हैं। योजना के लिए सरकार ने जमीन क्रय की पहली किस्त जारी कर दी है। जीडीए के अनुसार, पूरी परियोजना से न केवल नए आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे बल्कि रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।
वर्जन
बालापार, मानीराम और रहमतनगर में अनिवार्य अर्जन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। यह परियोजना जनहित में है और क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगी। गुरुकुल सिटी का लेआउट तैयार कर आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए
बोले किसान....
खेती ही हमारी आजीविका का साधन है। इतनी उपजाऊ खेती का जबरन अधिग्रहण ठीक नहीं है। हम अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
- राम गोविंद निषाद
जमीन अधिग्रहण हो जाने से हमारा भविष्य खत्म हो जाएगा। हमारी आने वाली पीढ़ियां दोषी मानेंगी कि हम जमीन नहीं बचा पाए। हम अपनी जमीन नही देंगे।
- राजू सिंह