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यूपी: सीमा पर सख्ती के बाद बदला तस्करी का रास्ता, ट्रेन बनी चरस की नई ‘लाइन’, महिलाओं को बनाया जा रहा ‘कैरियर’

Tue, 22 Sep 2026 03:36 PM IST
Sharukh Khan वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, गोरखपुर

सार

सीमा पर सख्ती के बाद तस्करी का रास्ता बदल गया है। ट्रेन चरस की नई ‘लाइन’ गई है। सोनौली सीमा पर निगरानी बढ़ने के बाद तस्करों ने बिहार से दिल्ली-पंजाब जाने वाली ट्रेनों का सहारा लिया है। इस माह दो बड़ी कार्रवाइयों में 11 किलो से अधिक चरस बरामद हो चुकी है।
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सोनौली सीमा। 
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विस्तार
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भारत-नेपाल की सोनौली सीमा पर सख्ती बढ़ने के बाद तस्करों ने नेपाल से आने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए रास्ता बदलना शुरू कर दिया है। सड़क मार्ग पर निगरानी बढ़ने पर अब बिहार से दिल्ली-पंजाब जाने वाली ट्रेनों के जरिए चरस की खेप आगे पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। डीआरआई की सितंबर में हुई कार्रवाई के आंकड़े इस आशंका को मजबूत भी कर रहे हैं।
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20 सितंबर को गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर डीआरआई ने जननायक एक्सप्रेस से नेपाल मूल की दो महिलाओं को 6.078 किलो चरस के साथ गिरफ्तार किया। दोनों बिहार से ट्रेन में सवार हुई थीं और खेप को लुधियाना ले जाने की तैयारी थी। चरस के 12 पैकेट महिलाओं ने घुटने के पास बांधकर साड़ी के नीचे छिपा रखा था। अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी कीमत करीब 6.078 करोड़ रुपये बताई गई है।

20 दिन में 11 किलो से ज्यादा चरस
डीआरआई के अनुसार, सितंबर में अलग-अलग कार्रवाइयों में 11 किलो से अधिक चरस जब्त की जा चुकी है और पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले गोरखपुर में अमरनाथ एक्सप्रेस से 5.88 किलो चरस पकड़ी गई थी। मामले में दो महिलाओं समेत तीन लोग गिरफ्तार हुए थे। प्रारंभिक जांच में खेप के बिहार के सुगौली से ट्रेन में चढ़ाए जाने और लुधियाना ले जाने की बात सामने आई थी।

रक्सौल सीमा जांच के केंद्र में
सुगौली चंपारण का प्रमुख रेल जंक्शन है और रक्सौल भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा बड़ा व्यापारिक व यात्री केंद्र है। अक्तूबर 2025 में डीआरआई ने रक्सौल के जोकियारी चौक के पास 13.720 किलो चरस जब्त की थी। एजेंसी के अनुसार, खेप नेपाल से तस्करी कर लाई गई थी। 

 

इसी अवधि में पश्चिम चंपारण के एक अन्य मामले में 11.270 किलो चरस बरामद हुई थी। इस वजह से मौजूदा घटनाक्रम में रक्सौल-सुगौली पट्टी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बनती है। हालांकि, ताजा 6.078 किलो की बरामदगी के मामले में डीआरआई ने अभी यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है कि चरस नेपाल के किस सीमा बिंदु से भारत में दाखिल हुई थी।

महिलाओं को बनाया जा रहा ‘कैरियर’
ताजा कार्रवाई में जिस तरह दो महिलाओं ने शरीर पर चरस छिपाई, उससे तस्करी के तौर-तरीके में बदलाव का संकेत मिलता है। सितंबर की दूसरी कार्रवाई में भी दो महिलाएं पकड़ी गई थीं। इससे पहले भी बिहार में ट्रेन से महिलाओं के जरिए चरस ले जाने के मामले सामने आ चुके हैं।

 

नेपाल से पंजाब तक बन रही नई सप्लाई चेन
डीआरआई के अधिकारियों का कहना है कि टीम की हालिया कार्रवाइयों में एक समान पैटर्न उभरता दिख रहा है कि नेपाल से जुड़े चरस नेटवर्क की खेप बिहार पहुंचने के बाद ट्रेन के जरिये उत्तर प्रदेश होते हुए पंजाब तक ले जाने की कोशिश की जा रही थी। 
 

ताजा मामले में गंतव्य लुधियाना बताया गया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि खेप बिहार तक कौन पहुंचा रहा था, महिलाओं को किसने ट्रेन में सवार कराया और पंजाब में इसे किसे सौंपा जाना था।

 

नेपाल से पगडंडी के रास्ते लाए जा रहे चरस को पकड़ा
डीआरआई के अनुसार, मई 2026 तक पिछले एक साल में लखनऊ जोनल यूनिट ने बिहार में 107.5 किलो चरस और 1,277.81 किलो गांजा समेत बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए थे। इन मामलों में 31 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। 

 

फिलहाल उपलब्ध मामलों में रक्सौल-सुगौली बेल्ट सबसे महत्वपूर्ण जांच कड़ी के तौर पर सामने आ रही है, जबकि सीतामढ़ी के कन्हौली जैसे दूसरे सीमा क्षेत्रों में भी नेपाल से चरस आने के मामले दर्ज हुए हैं। सितंबर में कन्हौली पुलिस ने नेपाल से पगडंडी के रास्ते आए एक व्यक्ति से 1.2 किलो चरस जैसा पदार्थ बरामद किया था।

 
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ट्रेनों से तस्करी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। पकड़े गए लोगाें से पूछताछ और सबूतों के आधार पर उनके नेटवर्क को ध्वस्त किया जा रहा है।- आनंद प्रकाश त्रिपाठी, जॉइंट डायरेक्टर, नारकोटिक्स
 
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