शहर में जलभराव की समस्या से निजात के लिए नगर निगम के नए भवन में बनाया गया है कंट्रोल रूम
नगर निगम में डिजिटल लाइब्रेरी और संग्रहालय भी बनकर है तैयार
गोरखपुर। शहरी बाढ़ से निपटने के लिए नगर निगम ने अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम बनाया है। निगम के नवीन भवन में इसका कंट्रोल रूम बना है। इसमें लगे सेंसर से डाटा मिलना भी शुरू हो गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ जल्द ही इसका लोकार्पण कर सकते हैं।
शहरवासियों को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर निगम ने अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम बनाया है। 56.76 करोड़ रुपये की इस परियोजना का शिलान्यास भी सीएम ने ही किया था। इसके तहत अर्ली वार्निंग सिस्टम बना है। फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम से शहर के बड़े नालों की निगरानी होगी। नालों में सेंसर लगाए गए हैं जो पानी के स्तर के बारे में अपडेट देंगे। नदी के जलस्तर की सटीक जानकारी के लिए भी सेंसर लगाए जाएंगे। इन सभी को संचालित करने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। इससे कहां कितनी बारिश हुई इसका भी डेटा मिल जाएगा।
अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि नगर निगम परिसर में अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल, डिजिटल लाइब्रेरी और संग्रहालय का काम लगभग पूरा है। जल्द ही सीएम के हाथों इनका लोकार्पण कराया जाएगा।
100 साल पुरानी लाइब्रेरी बनी डिजिटल
नगर निगम परिसर में मौजूद 100 साल पुरानी लाइब्रेरी के जीर्णोद्धार का काम लगभग पूरा हो गया है। इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। 100 वर्ष पुरानी इस लाइब्रेरी को होम्स क्लेन के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान 1925 में हुई थी। शुरुआत में होम्स क्लेन अमन-ओ-अमन पुस्तकालय कहा जाता था, लेकिन बाद में नगर निगम ने इसका नाम बदलकर राहुल सांस्कृत्यायन पुस्तकालय कर दिया। लाइब्रेरी में करीब 15 हजार पुस्तकें हैं, जिसमें कुछ किताबें ऐसी हैं, जो आज किसी भी दूसरी लाइब्रेरी में मिलनी मुश्किल हैं। लाइब्रेरी में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए वाईफाई और कंप्यूटर की सुविधा रहेगी। कुछ पुरानी किताबों को निगम संरक्षित भी कर रहा है।
पुराने सदन हॉल में तैयार है संग्रहालय
नगर निगम के पुराने भवन को संग्रहालय बनाने का कार्य भी पूरा है। इसमें गोरखपुर से संबंधित प्राचीन वस्तुएं, अभिलेख, फोटो आदि प्रदर्शित किए जाएंगे। नगर निगम के 124 साल पुराने भवन में संग्रहालय बनाया जा रहा है। इसे बना रही फर्म दो साल तक संग्रहालय का संचालन करेगी। इसके बाद नगर निगम उसे संचालित करेगा। इस पुराने भवन का निर्माण 1899 में किया गया था। इसे अमन-ओ-अमन के नाम से जाना जाता था। इतना पुराना भवन होने के बाद भी इसकी मजबूती बेमिसाल है। इसके लिए पुराने दस्तावेज और वस्तुएं तलाशी जा रही हैं।