गोरखपुर। नाइन कंपनी के जीएम से 2.70 करोड़ की जालसाजी के आरोप में तेलंगाना से पकड़कर आए आरोपी मेटापल्ली रमेश और अल्ले सत्यम जेल जाने के नाम पर दहाड़ मारकर रोने लगे। उनसे पूछताछ में पता चला कि जालसाजी की रकम ढाई हजार बैंक खातों में भेजी गई है।
आरोपी रमेश ने कहा कि वह ऑटो पार्ट्स और डेयरी के धंधे में खुश था। अधिक रुपये कमाने के लालच में वह जालसाजों के चंगुल में फंस गया। वहीं सत्यम भी अपने किए पर शर्मिंदा नजर आया। उसने कहा कि लालच के चक्कर में वह दलदल में फंसता चला गया। अंजाम का पता होता तो कभी ऐसा काम नहीं करता। वह बार-बार यही कह रहा था कि उसने कोई जालसाजी नहीं की है। उसने खाते उपलब्ध कराने का जुर्म स्वीकार किया। पुलिस ने रविवार को विशेष कोर्ट में पेश कर दोनों को जेल भिजवा दिया।
साइबर थाने की पुलिस की जांच में सामने आया है कि 13 और 14 नवंबर को जालसाजी कर 2.70 करोड़ रुपये ढाई हजार खातों में भेजे गए हैं। इसमें अधिकतर पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, राजस्थान और बिहार के बैंक खाते हैं। ढाई हजार खातों की जांच पड़ताल कर खाताधारकों तक पहुंचकर पूछताछ करना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती है।
सत्यम ने पूछताछ में महाराष्ट्र के पुणे के किसी व्यक्ति का नाम बताया है। सत्यम के अनुसार व्हाट्सएप के जरिये पुणे के व्यक्ति से वह जुड़ा था। व्हाट्सएप पर कॉल कर उसे बैंक का खाता देने के लिए कहा जाता था। इसके बदले उस खाते में आने वाली रकम के तीन फीसदी रुपये उसे मिलते थे। इसमें से एक फीसदी वह खाताधारक को देता था। सत्यम 50 से अधिक बैंक खाते जालसाजों को उपलब्ध करा चुका है। पहली बार वह फंसा है।
तीन राज्यों में जाएगी पुलिस
दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद हैदराबाद, पश्चिम बंगाल के कुछ व्यक्तियों के नाम-पते साइबर अपराध थाने की पुलिस के हाथ लगे हैं। अब इन राज्यों में जाकर आरोपियों से पूछताछ करेगी। हालांकि ये इतना आसान भी नहीं है। कई जगहों पर जाने पर पता चल रहा है कि आरोपी किराए के घर में थे। अब वे वहां नहीं रह रहे हैं। ऐसे में अब उनका नया ठिकाना खोजना पुलिस के लिए एक बड़ा सिरदर्द है।