पहले बेटे की अर्थी काे कंधा दिया अब पोते-पोती को चिता को देंगे मुखाग्नि
सुबह से ही नाराज था मोहित, पटककर तोड़ दिया था मोबाइल फोन
अभी 10 दिन पहले ही अहमदाबाद से घर आया था मोहित, पूरा परिवार था उस पर आश्रित
गोरखपुर। हरपुर-बुदहट के कूचडेहरि गांव में बुधवार को हुई घटना से पूरा क्षेत्र अवाक रह गया। मोबाइल बनवाने के लिए 1500 रुपये नहीं मिलने पर मोहित कन्नौजिया ने (18) फंदे पर लटक कर जान दे दी। जबकि, उस पर ही विधवा मां, बुजुर्ग दादा और अविवाहित बहन की देखरेख का जिम्मा था। 10 साल पहले पिता की मौत के बाद उसने आगे बढ़कर बचपन में ही अपनी जिम्मेदारी संभाली भी थी और अहमदाबाद में कपड़े प्रेस करके भी वह घर का खर्च चला रहा था। पोते-पोती की मौत से आहत बुजुर्ग बाबा हरिलाल बार-बार यही कह रहे थे कि जरा भी अंदाजा होता तो आज वे घर से बाहर ही नहीं जाते।
बताया जा रहा है कि मोहित की मौत से दुखी मां कौशल्या और बहन सुप्रिया (14) ने घर में एक शीशी में रखी सल्फास की 10 गोलियां खा ली। हालत बिगड़ने पर गांव के लोगों ने दोनों को बीआरडी मेडिकल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान सुप्रिया की मौत हो गई। वहीं कौशल्या की हालत गंभीर बनी हुई है। चर्चा है कि सुबह ही किसी बात से नाराज मोहित ने अपना मोबाइल पटककर तोड़ दिया था। बाद में उसे ही बनवाने के लिए 1500 रुपये अपनी मां से मांग रहा था। मां ने डांट फटकार लगाकर पैसे देने से इन्कार कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, मां-बेटी दोपहर में खाना बनाकर बाजार गई थी। इस दौरान घर पर मोहित अकेला था। कीचन से मोहित ने खाना निकाला था, लेकिन उसे हाथ भी नहीं लगाया। थाली में परोसा भोजन पड़ा था। पता नहीं उसके मन में क्या आया वह घर में लगी कुंडी में फंदा लगाकर लटक गया।
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पहले बेटे की अर्थी काे कंधा दिया अब पोते-पोती को चिता को देंगे मुखाग्नि
भाई-बहन की मौत पर चीख पुकार मच गई थी। मोहित के बाबा हरिलाल (72) पशु चराने गए थे। वापस लौटे तो दरवाजे पर भीड़ देखकर सहम गए। घटना सुनते ही हाय-हाय करते जमीन पर बैठ गए। वह रोते हुए कह रहे थे कि पता होता तो मैं कभी नहीं जाता। सुप्रिया और मोहित ही मेरे लिए सहारा थे। दिन भर सुप्रिया मेरी सेवा करती थी। बेटे की मौत 10 साल पहले हो चुकी है। पहले बेटे को कंधा दिया, अब पोते-पोती कंधा देना पड़ेगा। यह पता होता तो पहले ही अपना गला घोंट लेता। मेरी तो समझ में ही नहीं आ रहा है कि अचानक एक ही दिन में क्या हो गया। 10 दिन पहले ही अहमदाबाद से मोहित घर आया था। इसको लेकर घर में सभी लोग खुश थे।
अहमदाबाद में काम करता था मोहित
मौत की सूचना पर घर पहुंची मोहित की शादी शुदा दोनों बहने रोली और होली का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों बहनों के ससुराल में सूचना दी गई थी। उन्होंने बताया कि किसी ने यह नहीं बताया कि दो मौतें हुई हैं, कहा गया था तबियत खराब है। यहां आकर पता चला कि मेरा भाई और बहन दोनों अब दुनिया में नहीं हैं। मां की भी हालत गंभीर है। पिता की मौत के बाद पूरे घर का एक ही सहारा मोहित था। वह अहमदाबाद में एक कालोनी में लोगों के कपड़े प्रेस करता था। इससे मिले पैसे घर भेजता था। जिससे परिवार चलता था। अब बुजुर्ग बाबा और मां का ख्याल कौन रखेगा। यह कहते-कहते दोनों बहने दहाड़ मारकर रोने लगी।