भारत सरकार की पेयर योजना के अंतर्गत दोनों संस्थानों में अनुबंघ की तैयारी
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय आईआईटी धनबाद के साथ मिलकर स्मार्ट माइनिंग पर शोध करेगा। इसके अंतर्गत नए लोकेशन पर खुदाई के मानक, सप्लाई चेन, वेस्ट मैटरियल का इस्तेमाल जैसे विषय पर शोध प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। एमएमएमयूटी ने इसके लिए आईआईटी धनबाद को 17 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा है।
भारत सरकार की पेयर योजना का लाभ उठाने के उद्देश्य से एमएमएमयूटी ने ''''सस्टेनबल स्मार्ट माइनिंग'''' विषय पर शोध के लिए आईआईटी धनबाद से जुड़ने की योजना बनाई है। विश्वविद्यालय के पेयर योजना समन्वयक डाॅ. एल विट्ठल गोले ने बताया कि ''''सस्टेनबल स्मार्ट माइनिंग'''' विषय पर शोध प्रकिया आगे बढ़ाने के दौरान विषय के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को छूने की कोशिश होगी। माइनिंग के क्षेत्र में विश्वविद्यालय अपना योगदान सुनिश्चित कर सकेगा। इससे विश्वविद्यालय के शोध का दायरा भी बढ़ेगा।
उन्हाेंने बताया कि विश्वविद्यालय ने इस बार एनआईआरएफ में स्थान पाया था। रैंकिंग के चलते ही आईआईटी धनबाद ने विश्वविद्यालय को अनुबंध का प्रस्ताव मांगा था, जिसे विश्वविद्यालय की ओर से भेज दिया गया है। इस अनुसंधान प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के पांच विभागों का सहयोग लिया जाएगा। इनमें कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन, केमिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग व केमेस्ट्री विभाग शामिल हैं। इन विभागों से 15 फैकल्टी को योजना से जोड़ने का प्रस्ताव बनाया गया है।
''''वेस्ट टू वेल्थ'''' थीम
डॉ. गोले ने बताया कि ''''वेस्ट टू वेल्थ'''' थीम के साथ शोध को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अंतर्गत नए लोकेशन पर खुदाई के मानक, सप्लाई चेन, वेस्ट मैटरियल का इस्तेमाल जैसे विषय पर शोध प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जल्द ही इसे लेकर अनुबंध की औपचारिकता भी पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पेयर योजना के जरिए विश्वविद्यालय को शोध के क्षेत्र में विषय विशेषज्ञता प्राप्त हो जाएगी। प्रस्ताव में शोध प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय ने आईआईटी से 12 शोधार्थी भी मांगे हैं।
कोट...
भारत सरकार की पेयर योजना से जुड़ने का सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। आईआईटी धनबाद से जुड़कर माइनिंग जैसे विषय पर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को पहली काम करने का मौका मिलेगा।
- प्रो. जेपी सैनी, कुलपति