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Gorakhpur News: प्रवासी पक्षी संक्रमण लेकर आए...कौवे घूमकर फैलाए

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चिड़ियाघर के वेटलैंड में कौओं के लिए है भरपूर भोजन
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जानवरों का जूठन वेटलैंड में फेंकते हैं, नहीं चलती डिकंपोजर मशीन


गोरखपुर। चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू का संक्रमण प्रवासी पक्षियों के जरिये पहुंचा। प्राणि उद्यान के वेटलैंड में बड़ी संख्या में कौवे रहते हैं। कारण है कि यहां उनके लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध है। प्रवासी पक्षियों से संक्रमण कौओं में फैला और कौवे से वन्यजीवों में फैलता गया।
चिड़ियाघर में जानवरों के जूठन से खाद बनाने के लिए डिकंपोजर प्लांट स्थापित किया गया है। लेकिन, वेस्ट डिकंपोजर प्लांट के चालू नहीं होने से चिड़ियाघर से निकलने वाले जूठन को परिसर के अंदर गड्ढा खोदकर या जंगल क्षेत्र में फेंक दिया जाता था। इसे खाने के लिए कौवे समेत अन्य पक्षी वहां पहुंचने लगे और धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। इसी वजह से बड़ी संख्या में कौवे भी पहुंच गए। उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन मिल जाता है। हालांकि, बाद में जूठन को नगर निगम की टीम ले जाने लगी।
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निदेशक विकास यादव ने कहा कि चिड़ियाघर का प्रभार मिलने के बाद उन्होंने डिकंपोजर प्लांट को चालू कराया। इसके बाद से वन्यजीवों के जूठन और खरपतवार प्लांट के माध्यम से कंपोस्ट खाद तैयार होने लगा। लेकिन, जब से बर्ड फ्लू का मामला आया है, जूठन को जलाकर नष्ट कर दिया जा रहा है। कौओं की अधिक संख्या के पीछे उन्हें पर्याप्त भोजन और घोसला बनाने के लिए पेड़-पौधों का होना है। अभी हिरण समेत अन्य वन्यजीवों को भोजन खुले में दिया जाता है और उनके अपशिष्ट भी खुले में रखे जाते है, जिसे कौए खाते हैं।
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बत्तख बने कैरियर
विशेषज्ञों का कहना है कि रामगढ़ताल और प्राणि उद्यान के वेटलैंड में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। इनमें बत्तखों की प्रजाति भी है। बत्तखों में संक्रमण का खतरा अधिक है। वह बर्ड फ्लू के कैरियर होते हैं। इनसे संक्रमण कौओं में आ गया। उधर, सोमवार को वन विभाग को शहर के कई इलाकों से कौओं के मरने की सूचना मिली। इसके बाद से वन विभाग ने सभी को अलर्ट रहने को कहा है।
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