लखनऊ में हुई 16वें वित्त आयोग की बैठक में गोरखपुर का तीव्र शहरीकरण पर की चर्चा
नगर निकायों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए 16वें वित्त आयोग के लिए सुझाव
बेहतर कार्यप्रणाली, स्थायी विकास, तकनीकी उन्नयन, सामाजिक समावेशन पर जोर
गोरखपुर। लखनऊ में 16वें वित्त आयोग की बैठक में गोरखपुर के मेयर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने विकास कार्यों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में गोरखपुर में आधारभूत ढांचे में उल्लेखनीय सुधार और नागरिक सुविधाओं में वृद्धि की वजह से पड़ोसी राज्यों और जिलों से बड़ी संख्या में लोग आकर यहां निवास कर रहे हैं।
मेयर मंगलेश श्रीवास्तव ने 15वां वित्त की धनराशि की उपयोगिता भी गिनाई। बल्कि 16वां आयोग के लिए सुझाव भी दिए। 15वें वित्त आयोग में टाईड एवं अनटाईड ग्रांट के तहत 50-50 प्रतिशत राशि के निर्धारण को अप्रभावी बताया और सुझाव दिया कि 16वें वित्त आयोग में इस पर कोई बाध्यता न हो। इसके बजाय, प्रत्येक प्रमुख क्षेत्र (हेड) में न्यूनतम 10 फीसदी राशि खर्च करने की अनिवार्यता रखी जाए। जिससे नगर की आवश्यकताओं के अनुसार लचीलापन बना रहे। इसके अलावा सुझाव दिया कि 16वें वित्त आयोग में एजुकेशनल व तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति की अनुमति दी जाए।
साथ ही पीपीपी मॉडल पर चल रही परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की सुविधा की आवश्यकता पर जोर दिया। मेयर ने मांग किया कि 16वें वित्त आयोग में सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइट्स, स्मार्ट जल मीटर जैसे टिकाऊ उपायों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मेयर ने नवगठित वार्डों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए अलग से बजट का प्रावधान करने की मांग की। महिला शौचालय, महिला सशक्तिकरण केंद्र, वृद्धजन सहायता केंद्र जैसे समाजोपयोगी कार्यों पर भी आयोग से विशेष व्यय की अनुमति मांगी।
डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देना
मेयर ने ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली और जीआईएस आधारित परिसंपत्ति मानचित्रण जैसे डिजिटल उपायों को आयोग से समर्थित किए जाने की मांग की। जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन पर ध्यान देने का सुझाव दिया। कहा कि आपदा-रोधी अवसंरचना, वर्षा जल संचयन, सूखा व बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए धनराशि आवंटित की जाए।