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UP: 'लड़की नहीं हूं, लेकिन...', जन्म लेते ही अपनों ने ठुकराई महिमा; अब बनना चाहती है राहुल; जानें पूरा मामला

Wed, 16 Apr 2025 03:34 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, नोएडा के बाद अब महिमा को गोरखपुर के शेल्टर होम में भेजा गया है। महिमा को असामान्य देखकर परिवार ने आगरा के शेल्टर होम की सीढ़ियों पर छोड़ दिया था। 
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गोरखपुर के शेल्टर होम में भेजी गई महिमा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर शहर के गरिमा गृह शेल्टर होम में करीब 17-18 साल की महिमा उर्फ राहुल लखनऊ के बालिका गृह से 22 मार्च को आई है। महिमा के मुताबिक, उसके पैदा होते ही असमान्य शरीर देखकर घरवालों ने लोकलाज के चलते आगरा के सेंट मदर टरेसा शेल्टर होम की सीढि़यों पर छोड़ दिया था। 
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अब वह अपना जेंडर बदल कर लड़का बनना चाहती है। तारामंडल स्थित गरिमा गृह शेल्टर होम की निदेशक एकता माहेश्वरी ने बताया कि महिमा (राहुल) ने अपनी जिंदगी के बीते 17 साल में ढेर सारी चुनौतियों का सामना किया है। 

आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र में 17 साल पहले उसका जन्म हुआ। जन्म के बाद जेंडर का पता नहीं चल पा रहा था, इस वजह से परिवार के लोगों ने उससे छुटकारा पाने के लिए आगरा के शेल्टर होम की सीढि़यों पर छोड़ दिया। 
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शेल्टर होम में उसे महिमा नाम दिया गया। उन्होंने बताया कि कक्षा सात तक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल पढ़ाई की। वह पढ़ने में बहुत तेज है, लेकिन उसे मेल कैरेक्टर में जीना अच्छा लगता है। होश संभालते ही खुद से वह अपना नाम राहुल बताने लगी, लेकिन उसे मजाक का सामना करना पड़ा।

छिपकर मिलती थी बहन, फिर भिजवाया घर
आगरा के शेल्टर होम में महिमा उर्फ राहुल से मिलने उसकी मां और बहन आती थी। शेल्टर होम संचालिका को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने उसके घर के बारे में जानकारी जुटाई। महिमा उर्फ राहुल के दो भाई और चार बहने हैं। संचालिका ने 13 साल की उम्र में उसे घर भिजवाया। वहां दो माह भी परिवार के लोग उसे स्वीकार नहीं कर पाए। गलत व्यवहार से तंग आकर उसने घर से भागकर कुछ दिन सड़क पर भीख मांगी। इसके बाद कुछ दिन वह ग्वालियर के एक शेल्टर होम में रही। इसके बाद वह आगरा फिर कानपुर बालिका गृह शेल्टर होम भेजी गई।

फिरोजाबाद में हुई बुलिंग का शिकार
एकता ने बताया कि कानपुर बालिका गृह में संख्या अधिक होने की वजह से महिमा समेत कुछ लड़कियों को नोएडा के शेल्टर होम भिजवाया गया। वहां मेडिकल परीक्षण के बाद पुरुष जैसी हरकत देख महिमा को फिरोजाबाद की लड़कों की संस्था को सौंप दिया गया। यहां काफी दिनों तक बुलिंग का शिकार होने पर संस्था ने तीन बार आगरा स्थित घर पर भिजवाया, लेकिन परिवार के लोगों ने रखने से इन्कार कर दिया। इसके बाद वह भटकते हुए लखनऊ पहुंच गई। यहां चाइल्ड लाइन की टीम ने रेस्क्यू कर उसे लखनऊ के बालिका गृह पहुंचाया। यहां पर उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया, इसके बाद ट्रांसजेंडर मानकर उसे गोरखपुर के गरिमा गृह शेल्टर होम में भिजवाया गया।
 

लड़की नहीं हूं, लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं
महिमा (राहुल) ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि जब से होश संभाला है, उसे महिमा यानी लड़की समझा गया। जबकि वह खुद को पुरुष महसूस करती है। कहीं से भी उसमें लड़कियों जैसे लक्षण नहीं है। यह बात कोई नहीं मानता है। गोरखपुर में उसे राहुल बुलाया जाता है। 
 
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इस सच को आगे चलकर साबित करके दिखाएगी। शेल्टर होम की निदेशक एकता ने बताया कि महिमा उर्फ राहुल पढ़ना चाहती है, हमेशा अपनी डायरी में अपनी दिनचर्या रोज लिखती है। समाज के लिए उसका संदेश है-मुझे बस एक मौका दो, मैं दिखा दूंगा कि क्या कर सकता हूं।
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