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Gorakhpur News: देश के लिए मेडल जीत चुके हैं जोंटी और सौरभ

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खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत के दम पर बनाई पहचान
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गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में आयोजित हुई कुश्ती प्रतियोगिता के उत्तर प्रदेश केसरी, उत्तर प्रदेश कुमार और वीर अभिमन्यु का खिताब जीतने वाले तीनों ही पहलवान कड़ी मशक्कत के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश केसरी बने जोंटी भाटी, उत्तर प्रदेश कुमार बने सौरभ यादव और वीर अभिमन्यु बने मोनू यादव बेहद ही साधारण परिवार के हैं। मोनू के पिता मिस्त्री हैं। वहीं, जोटीं के पिता किसान हैं। सौरभ के पिता सीआरपीएफ में सिपाही हैं। जोंटी और सौरभ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को पहचान दिलाई है और मेडल जीते हैं। वहीं, मोनू ने अभी कुश्ती की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलना शुरू किया है।
पिता को देख सौरभ ने की कुश्ती की शुरुआत
खेल छात्रावास गोरखपुर के खिलाड़ी सौरभ यादव मूलरूप से जौनपुर के रहने वाले हैं। इनके पिता लालमन यादव सीआरपीएफ में हैं। वहीं, मां अमृता यादव गृहिणी हैं। सौरभ के पिता भी पहलवान रहे हैं। उन्हें ही देखकर सौरभ ने गांव के अखाड़े से कुश्ती की शुरुआत की। पिता को लगा कि उनका बेटा कुश्ती में बेहतर कर सकता है तो उन्होंने सौरभ का प्रवेश वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में करा दिया। सौरभ ने अपने बेहतर प्रदर्शन के दम पर एशिया चैंपियनशिप में देश को सिल्वर मेडल दिलाने का काम किया। इसके साथ ही वह कुश्ती की वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी भाग ले चुके हैं।
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राजगीर मिस्त्री हैं मोनू के पिता
गोंडा जिले के नंदनीनगर के रहने वाले पहलवान मोनू यादव के पिता शिवकुमार यादव राजगीर मिस्त्री हैं और मां राधिका देवी गृहिणी हैं। माेनू ने बचपन में गांव में ही कुश्ती खेलने की शुरुआत की। पिता की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण इन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मोनू ने कई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में मेडल जीते हैं। इसके साथ ही अंडर-15 राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड और सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। मोनू का लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है।
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एशिया चैंपियनशिप में देश के लिए मेडल जीत चुके हैं जोंटी
गौतमबुद्ध नगर के जमालपुर गांव के रहने वाले पहलवान जोंटी भाटी अंडर-23 में देश के लिए गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने सीनियर एशिया चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल देश के नाम किया है। चार बार भारत केसरी और तीन बाद उत्तर प्रदेश केसरी का खिताब जीत चुके हैं। उन्होंने 15 बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। जोंटी ने कुश्ती की शुरुआत गांव से ही की। शुरू में उन्हें माता-पिता का समर्थन नहीं मिला। भाई अभिषेक ने जोंटी का साथ दिया। इसके बाद जोंटी ने नोएडा में कुश्ती का प्रशिक्षण लिया। अब उनकी सफलता पर गांव ही नहीं पूरा जिला फक्र कर रहा है।
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