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Gorakhpur News: चिड़ियाघर के अस्पताल में वन्यजीवों के लिए बनेगा आइसोलेशन वार्ड

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प्राणि उद्यान में बर्ड फ्लू के मामले में शासन की नामित कमेटी ने जांच रिपोर्ट में दिए सुझाव
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वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और आईवीआरआई बरेली के विशेषज्ञ थे शामिल
जू-कीपरों की समय-समय पर ट्रेनिंग कराने के भी दिए सुझाव
गोरखपुर। चिड़ियाघर (शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान) में बर्ड फ्लू के मामले में शासन की ओर से नामित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। टीम ने चिड़ियाघर के अस्पताल में वन्यजीवों के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड बनाने और जू-कीपरों की ट्रेनिंग के सुझाव दिए हैं, ताकि भविष्य में यदि ऐसा संक्रमण फैलता है तो उपचार के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हों।
चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू से वन्यजीवों की मौत के बाद शासन की ओर से नामित हाई कमेटी जांच के लिए पहुंची थी। इसमें वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) से डॉ. पराग निगम, इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई), बरेली से डॉ. एम करिकलन, डब्ल्यूआईआई के रिटायर्ड हेड वाइल्डलाइफ हेल्थ और उत्तराखंड के रिटायर्ड प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. पीके मलिक शामिल थे।
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टीम ने 21 और 22 मई को चिड़ियाघर परिसर और अस्पताल का निरीक्षण किया था। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शासन और चिड़ियाघर प्रशासन को भेज दी है। इसमें कहा गया है कि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। बीमार वन्यजीवों के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाएं। छोटे-बड़े वन्यजीवों के लिए बाड़ा होना चाहिए। जू-कीपर और कर्मचारियों की समय-समय पर ट्रेनिंग आयोजित हो। इनके लिए क्षमता वर्द्धन कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल में पक्षियों के क्रॉल के बगल में ही तेंदुए और बाघ को देख हैरानी जताई थी। अस्पताल भी टीम को छोटा लगा था। चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि डब्ल्यूआईआई की टीम ने रिपोर्ट भेज दी है। इसमें जो सुझाव दिए गए हैं, उन्हें लागू किया जाएगा।
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पांच वन्यजीवों की हो चुकी है मौत

चिड़ियाघर में डेढ़ माह के अंदर पांच जानवरों की मौत हो चुकी है। 30 मार्च को पीलीभीत से रेस्क्यू कर लाए गए बाघ केसरी की मौत सबसे पहले हुई थी। इसके बाद पांच मई को मादा भेड़िया भैरवी, सात को बाघिन शक्ति और आठ मई को तेंदुआ मोना की मौत हुई थी। 23 मई को एक कॉकाटील की मौत हो गई थी।
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