खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई कारखानों से लिए पानी के सैंपल
आरओ वाटर के नाम पर बेचे जा रहे खुले पानी की भी होगी जांच
गोरखपुर। धंधेबाजों ने बोतलबंद पानी को भी नहीं छोड़ा। शहर में बोतलबंद और पैकेट वाले पानी के दो नमूने फेल हो गए हैं। इनमें शुद्ध पानी में मिलने वाले तत्व ही नहीं हैं। केवल क्लोरीन मिला है। इसीलिए इन नमूनों को अधोमानक श्रेणी में रखा गया है। इस रिपोर्ट के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने एहतियात के तौर पर बोतलबंद व पैकेट वाले पानी का काम करने वाले आठ कारखानों से सैंपल लिए हैं। वहीं आरओ वाटर के नाम पर बेचे जा रहे खुले पानी की भी जल्द ही जांच होगी।
इधर, गीडा में पैकेज्ड पानी का कारखाना चलाने वाले पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि करीब चार लाख बोतल पानी प्रतिदिन गीडा व शहर में लगे 10 पंजीकृत कारखानों से निकलता है। इसके अलावा करीब डेढ़ लाख बोतल पानी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आता है। इसके अलावा शहर में 10 से अधिक अवैध कारखाने भी हैं, जहां पैकेट व बोतलों में पानी भरकर बाजार में बेचा जाता है।
पिछले दिनों गोरखनाथ क्षेत्र समेत शहर के कई इलाकों में बिकने वाले पैकेट व बोतल वाले पानी के नमूने लिए गए थे। इनमें से दो नमूनों की रिपोर्ट अधोमानक आई है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि इस पानी में केवल क्लोरिन मिला है, बाकी तत्व नहीं हैं। इस इनपुट के बाद ही आठ पंजीकृत कारखानों से पानी के 10 नमूने लिए गए हैं। इनको विशेष जांच के लिए भेजा गया है, जिससे पानी की गुणवत्ता की विधिवत जांच हो सके।
600 आरओ प्लांटों पर भी होगी जांच
शहर में करीब 600 आरओ प्लांट हैं। इनमें से प्रत्येक प्लांट पर हर दिन 2000 लीटर से अधिक पानी की बिक्री होती है। मोहल्लों में लगे इन आरओ प्लांटों में से अधिकांश का तो किसी विभाग में पंजीकरण भी नहीं है। इनके पानी की गुणवत्ता की जांच भी नहीं होती। अब तो ऑटो पर 1000 लीटर की टंकी रखकर उससे ही मोहल्लों में घूम-घूमकर पानी बेचा जाता है। जबकि नियम यह है कि जिस जार में पानी दिया जा रहा है, उसे सील पैक किया जाएगा और उस पर उत्पादनकर्ता का नाम, घुलनशील तत्व आदि का नाम लिखा होगा। ऐसा कहीं होता नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग अब इसकी भी जांच की तैयारी में जुटा है।
ये हैं शुद्ध पानी के मानक
रसायन विज्ञान के प्रवक्ता बालेश्वर त्रिपाठी के अनुसार, पानी में 88.81 प्रतिशत हाइड्रोजन और 11.19 प्रतिशत ऑक्सीजन होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जो मानक तय किए हैं, उसके अनुसार पानी का पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। इसमें क्लोराइड की मात्रा 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। नाइट्रेट की मात्रा 50 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि शुद्ध पानी में किसी भी तरह का बैक्टीरिया और वायरस नहीं होना चाहिए।
एक्सपर्ट कमेंट
पानी खराब तो तबीयत भी खराब
पानी की शुद्धता केवल फिल्टर सिस्टम से ही नहीं, बल्कि जिस प्लास्टिक में रखा गया है, उसकी गुणवत्ता पर भी निर्भर है। अगर पानी शुद्ध नहीं है तो उसकी वजह से टाइफाइड और डायरिया हो सकता है। बोतलबंद पानी को लोग शुद्ध मानकर पीते हैं, इसलिए उसकी गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
- डॉ. प्रशांत अस्थाना, परामर्शदाता, जिला अस्पताल
वर्जन
पानी के कुछ पुराने नमूनों की रिपोर्ट अधोमानक आई है। इसको ध्यान में रखते हुए आठ प्लांटों से 10 नमूने एकत्रित किए गए हैं। इनको जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। छोटे प्लांटों की भी जल्द ही जांच कराई जाएगी।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य