आरआरबी दफ्तर में पूर्व चेयरमैन का खास बाबू तैयार करवाता था भर्ती का पैनल
गोरखपुर। रेलवे में सहायक लोको पायलट और तकनीशियन की भर्ती में दो रेलकर्मियों और एक बाहरी युवक की तिकड़ी मशहूर थी। यह तिकड़ी अभ्यर्थियों से संपर्क साधकर सौदा तय कराती और पूर्व चेयरमैन पीके राय खुद हिसाब-किताब रखते थे। विभाग में तैनात उनका एक खास बाबू ही अभ्यर्थियों का पैनल तैयार करवाता था। जो अभ्यर्थी डील के मुताबिक चढ़ावा पहुंचा देते थे, उनका नाम नियुक्ति के लिए जारी पैनल में दर्ज हो जाता था। जो आनाकानी करते थे, उनका मामला लंबित कर दिया जाता था।
रेलवे विजिलेंस की जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है। 19 पेज की जांच रिपोर्ट में लिखा गया है कि बिना किसी उचित कारण के योग्य अभ्यर्थियों के पैनल में देरी की जाती थी। जिन अभ्यर्थियों ने आरआरबी कार्यालय से संपर्क किया, उन्हें तकनीशियन विनय कुमार श्रीवास्तव और कार्यालय सहायक वरुण राज मिश्रा तत्कालीन चेयरमैन प्रवीण कुमार राय से मिलवाते थे। तत्कालीन चेयरमैन स्वयं उनके आवेदन रखते थे।
इसके बाद अभ्यर्थियों को अज्ञात मोबाइल नंबरों से कॉल जाती और उन्हें व्हाॅट्सएप के माध्यम से संपर्क करने के लिए कहा जाता था। संपर्क होने पर पैनल में शीघ्रता से शामिल होने के लिए उन पर पैसे देने का भी दबाव डालते थे, जिन अभ्यर्थियों ने पैसे दिए, उनका पैनल में सफलतापूर्वक नाम शामिल कर लिया गया, जबकि जिन्होंने भुगतान करने से इन्कार कर दिया, उनका पैनल में शामिल होने में देरी हुई।
जांच रिपोर्ट में एक अभ्यर्थी सत्यजीत सिंह के बयान का जिक्र भी है जिसमें तत्कालीन चेयरमैन से मिलने के बाद सत्यजीत ने विनय कुमार श्रीवास्तव से मुलाकात की और उन्होंने सत्यजीत सिंह को बताया कि अभिषेक उर्फ सूरज कुमार श्रीवास्तव नामक व्यक्ति से मिल लें। अभिषेक उर्फ सूरज कुमार श्रीवास्तव ने मुलाकात के दौरान रुपये की मांग की और 85,000 रुपये सत्यजीत से लिए गए।
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तीन से पांच लाख रुपये तक होती थी मांग
आरआरबी दफ्तर में नियुक्ति के लिए पैनल में शामिल अभ्यर्थियों से तीन से पांच लाख रुपये की मांग की जाती थी। इसके बाद सौदेबाजी की जाती थी। सूत्रों की मानें तो तत्कालीन चेयरमैन के एक रिश्तेदार भी इसमें शामिल था। जब भी अभ्यर्थी हंगामा करते थे, वे उनके बीच जाकर उन्हें समझाता और उनका नाम और नंबर नोट कर लेता। इसके बाद अभ्यर्थियों के पास फोन जाने लगता था।
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पूर्व चेयरमैन को बर्खास्त करने की चर्चा
आरआरबी के चेयरमैन पीके राय को हटाकर 2022 में ईस्टर्न रेलवे के इलेक्टि्रकल विभाग में डिप्टी चीफ के पद पर भेजा गया था। रेल महकमे में चर्चा है कि रेलवे विजिलेंस की रिपोर्ट पर ही उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।