लोगों को बार-बार नगर निगम के चक्कर काटने की नहीं होगी जरूरत
गोरखपुर। नगर निगम ने संपत्ति कर से जुड़े विवादों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। निगम की अधिकृत एजेंसी ने सॉफ्टवेयर में प्रोग्रामिंग बदलाव कर एरियर सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे अब लोगों को बार-बार नगर निगम के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, इस सुविधा का लाभ केवल उन्हीं करदाताओं को मिलेगा, जिनके बिल में आपत्ति दर्ज होने के बाद सुधार किया गया है।
नगर निगम क्षेत्र में करीब 1.65 लाख संपत्ति करदाता हैं। चार वर्ष पहले तक कर निर्धारण को लेकर आपत्तियां लगभग नगण्य थीं लेकिन जीआईएस सर्वे के बाद कर निर्धारण की नई व्यवस्था लागू होने पर हजारों लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराईं। नगर निगम ने कई मामलों में सुधार भी किया लेकिन वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के एरियर में यह संशोधन नहीं दर्शाया गया। इससे लोगों और पार्षदों में नाराजगी थी। अब एजेंसी की ओर से किए गए सॉफ्टवेयर बदलाव के बाद इन एरियर में भी सुधार संभव हो गया है। अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि जिन करदाताओं ने आपत्ति दर्ज कराई थी और जिनका निस्तारण कर दिया गया है, उन्हें अब एरियर में भी छूट का लाभ मिलेगा।
नए वार्डों में चल रहा सर्वे
नगर निगम में शामिल 10 नए वार्डों में भी वित्तीय वर्ष से संपत्ति कर वसूला जाएगा। इसके लिए इन वार्डों में भी संपत्तियों का सर्वे कर जियो टैगिंग की जा रही है। खोराबार और हरसेवकपुर में सर्वे पूरा कर अब बिल भेजने की तैयारी है। 2018-19 में हुए सीमा विस्तार के अंतर्गत नगर निगम में 31 गांव शामिल हुए। इसके बाद 10 नए वार्डों का सृजन हुआ। इसमें रानीडीहा, खोराबार, बड़गो, संझाई, मोहनपुर, गुलरिहा, हरसेवकपुर, भरवलिया, देवी प्रसाद नगर और गायघाट वार्ड बनाया।