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Gorakhpur News: जालसाजी के मामले में हैदराबाद के रियल स्टेट कारोबारी ने दर्ज कराया बयान

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नाइन कंपनी के जीएम से 2.70 करोड़ की जालसाजी का मामला
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तेलंगाना से दो आरोपियों को पुलिस ने किया था गिरफ्तार, आंध्रा के जालसाजी की तलाश
गोरखपुर। नाइन कंपनी के जीएम से जालसाजी के मामले में बुधवार को साइबर थाने में हैदराबाद के रियल स्टेट कारोबारी ने मंगलवार को बयान दर्ज कराया। कारोबारी की कंपनी का खाता इस मामले में फ्रीज कराया गया है।
नाइन सेनेटरी नैपकिन के मालिक उद्योगपति अमर तुल्सयान की कंपनी के जीएम रमेश कुमार से व्हाट्सएप मैसेज कर 2.70 करोड़ रुपये की जालसाजी का मामला सामने आया था। साइबर थाने की पुलिस की जांच में पता चला कि जीएम से जालसाजी कर 1.80 करोड़ रुपये हैदराबाद के एक कंपनी के खाते में भेजे गए थे। जांच करते पुलिस टीम हैदराबाद भी गई थी। इसके बाद कंपनी का खाता फ्रीज करा दिया गया था। मंगलवार को हैदराबाद रियल स्टेट कारोबारी ने बयान देते हुए बताया कि कंपनी में एक आंध्र प्रदेश का एक व्यक्ति काम करता था। गलत कृत्यों की वजह से उसे निकाल दिया गया। बाद में पता चला कि कंपनी का इंटरनेट इस्तेमाल कर वह जालसाजी भी करता था। साइबर थाने की पुलिस बयान दर्ज कर आंध्र प्रदेश के जालसाज की तलाश में लग गई है। पुलिस की मानें तो वह बहुत ही शातिर है। उसके पकड़े जाने पर जालसाजी का पर्दाफाश हो सकता है।
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गिरफ्तार हो चुके हैं दो जालसाज
मामले में नवंबर माह में ही साइबर थाने की पुलिस ने तेलंगाना के दो जालसाजों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था। पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद किया। दोनों आरोपियों ने हैदराबाद से घटना को अंजाम दिया था। व्हाट्सएप एकाउंट बना कर नेट बैकिंग के जरिये 2.70 करोड़ रुपये दो खाते में ट्रांसफर किए गए थे। दोनों आरोपियों में एक मेटापल्ली रमेश, दतनूर चिलावाकुडुर गोलापल्ली थाना जगित्याल जनपद जगित्याल (तेलंगाना) का रहने वाला है तो वहीं अल्ले सत्यम इसी जनपद के पूचमा वाडा का निवासी है।

दो दिन में इस तरह हुई थी जालसाजी
नाइन कंपनी के जीएम रमेश कुमार ने बताया था कि 13 नवंबर को उनके व्हाट्सएप पर निदेशक अमर तुलस्यान का फोटो लगा हुआ मैसेज आया। इसमें लिखा था कि यह नंबर उनका ही है, इसे सेव कर लें। इसके बाद चैटिंग हुई, जिसमें लिखा गया कि वह एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, इससे संबंधित कागजात आपको भेज देंगे। यह बताने के बाद यस बैंक का खाता नंबर भेजा गया, जिसमें 90 लाख रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश आया। दूसरे दिन 14 नवंबर को भी उसी नंबर से एक और खाता नंबर भेजा गया, जिसमें 1.80 करोड़ रुपये भेजने का निर्देश मिला। पालन करते हुए उन्होंने ऑफिस के कर्मचारी नागेंद्र शुक्ला से नेट बैंकिंग के जरिये रुपये ट्रांसफर करवाए। 14 नवंबर को निदेशक से बात हुई तो पता चला कि ऐसा कोई निर्देश उन्होंने नहीं दिया।
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कोट-
इस केस की जांच पड़ताल कर 50 लाख रुपये से अधिक रकम वापस दिलाई जा चुकी है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भिजवा दिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश चल रही है।
- सुधीर जायसवाल, एसपी क्राइम
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