फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम: डिसेंट हॉस्पिटल में फर्जी मरीजों के नाम पर करोड़ों की ठगी-ये अस्पताल भी 'संदिग्ध'

Thu, 11 Sep 2025 01:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

आरोप है कि संचालकों ने हॉस्पिटल में मरीजों की फर्जी कागजात तैयार करके इंश्योरेंस की रकम का भुगतान करा लिया। इसके बाद उस रकम का आपस में बंदरबांट कर लिया। अब तक की जांच में गोरखपुर और बस्ती में स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में इंश्योरेंस कंपनी से 15 मरीजों के लगभग सवा करोड़ के भुगतान का पर्दाफाश हुआ है।
 
विज्ञापन
खुलासा करते एसपी सिटी व सीओ कैंट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रामगढ़ताल थाना पुलिस ने बुधवार को हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में धोखाधड़ी के बड़े खेल का पर्दाफाश किया। आरोप है कि तारामंडल स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में फर्जी मरीजों के नाम पर हेल्थ इंश्योरेंस की 1.20 करोड़ की ठगी कर ली गई। इस मामले में पुलिस ने अस्पताल संचालक समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
विज्ञापन


आरोपियों की पहचान रामगढ़ताल क्षेत्र के गेहुंआसागर निवासी अस्पताल संचालक शमशुल कमर और उसके पार्टनर कोतवाली के मेवातीपुर निवासी प्रवीण त्रिपाठी उर्फ विकास मणि त्रिपाठी के रूप में हुई। कई और अस्पताल भी पुलिस के रडार पर हैं।

आरोप है कि संचालकों ने हॉस्पिटल में मरीजों की फर्जी कागजात तैयार करके इंश्योरेंस की रकम का भुगतान करा लिया। इसके बाद उस रकम का आपस में बंदरबांट कर लिया। अब तक की जांच में गोरखपुर और बस्ती में स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में इंश्योरेंस कंपनी से 15 मरीजों के लगभग सवा करोड़ के भुगतान का पर्दाफाश हुआ है।

एसपी सिटी अभिनव त्यागी और सीओ कैंट योगेंद्र सिंह ने पुलिस लाइंस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि बजाज कंपनी के मैनेजर अनूप अग्रवाल ने रामगढ़ताल थाने में केस दर्ज कराया था। कंपनी को भुगतान में संदेह हुआ तो जांच कराई गई। जांच में पता चला कि दिल्ली निवासी सत्यवीर के नाम से मेरठ में फर्जी बैंक खाता खोला गया था।

इसके बाद डिसेंट हॉस्पिटल में सत्यवीर का इलाज और भर्ती दिखाकर उसके हेल्थ इंश्योरेंस का भुगतान करा लिया गया। जब सत्यवीर से पूछताछ की गई तो उसने इलाज व भर्ती होने से साफ इनकार कर दिया। इसी आधार पर कंपनी ने पुलिस से शिकायत की।

पुलिस की जांच में पता चला कि सत्यवीर का मामला अकेला नहीं है। इसी तरह 14 अन्य मरीजों के नाम पर भी डिसेंट हॉस्पिटल से फर्जी इलाज दिखाकर इंश्योरेंस क्लेम कराया गया। इस तरह बजाज कंपनी से कुल 1.20 करोड़ रुपये हड़प लिए गए।

कई इंश्योरेंस कंपनियों और नर्सिंग होम्स की भूमिका भी शक के घेरे में
आरोपियों से पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि इसी तरह की ठगी अन्य इंश्योरेंस कंपनियों से भी की गई है। साथ ही कई और नर्सिंग होम इस गिरोह में शामिल हो सकते हैं। पुलिस इनके खिलाफ भी जांच कर रही है।

फर्जी नर्सिंग होम का भी पर्दाफाश
जांच में एक और चौंकाने वाला पर्दाफाश हुआ। डिसेंट अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उसका समझौता बागपत स्थित एनेक्स हॉस्पिटल से है। मरीज सत्यवीर की वहीं पर दोबारा जांच कराई गई। पुलिस ने छानबीन की तो पाया कि इस नाम का कोई अस्पताल बागपत में है ही नहीं। यानी इलाज और फॉलोअप दोनों ही फर्जी कागजातों के आधार पर दिखाए गए थे।
विज्ञापन

स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में धोखाधड़ी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य अस्पतालों और लोगों की तलाश में जुट गई है; अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें