22 सितंबर से पहले जारी स्टॉक पर री-लेबलिंग अनिवार्य नहीं
गोरखपुर। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों में संशोधन के निर्देश दिए हैं। जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, 22 सितंबर से दवाओं व फॉर्मूलेशन (चिकित्सा उपकरणों सहित) पर जीएसटी दरों में कमी प्रभावी होगी।
औषधि महानियंत्रक की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया है कि 22 सितंबर से पहले बाजार में उपलब्ध दवाओं या उपकरणों के पैक पर री-लेबलिंग या री-स्टिकर लगाना अनिवार्य नहीं होगा, बशर्ते कि निर्माता और विपणन कंपनियां खुदरा विक्रेता स्तर पर संशोधित कीमत ही लें।
औषधि विभाग के निर्देशों के अनुसार, सभी निर्माता और विपणन कंपनियों को 22 सितंबर से प्रभावी नए जीएसटी दरों के आधार पर एमआरपी संशोधित करना होगा। इसके साथ ही कंपनियां संशोधित मूल्य सूची सरकार, राज्य औषधि नियंत्रकों, डीलरों और खुदरा विक्रेताओं को भेजेंगी। यदि कोई निर्माता या कंपनी पहले से उपलब्ध स्टॉक पर नया लेबल या स्टिकर लगाना चाहती है, तो उसे चरणबद्ध तरीके से ऐसा करने की अनुमति होगी। इस प्रक्रिया में यह ध्यान रखना होगा कि कहीं भी दवाओं या उपकरणों की कमी न होने पाए।