गोरखपुर। 15 लाख रुपये के अवकाश नकदीकरण भुगतान के लिए 10 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोपी ज्येष्ठ लेखा परीक्षक शहनवाज आलम को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अभिषेक कुमार चतुर्वेदी की अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
विशेष लोक अभियोजक घनश्याम त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता दिव्यांश पांडेय की मां सरोज दूबे कुशीनगर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, हाटा में प्रवक्ता थीं। वह 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुई थीं। उनके 300 दिनों के अवकाश नकदीकरण के करीब 15 लाख रुपये के भुगतान की पत्रावली संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में लंबित थी। पत्रावली शहनवाज आलम के पटल पर थी।
आरोप है कि भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए शहनवाज ने 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी। रिश्वत देने से मना करने पर पत्रावली में आपत्ति लगा दी गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 14 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत की। सत्यापन के बाद टीम ने 19 अगस्त को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में शहनवाज आलम को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में अभियोजन ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।