धरातल से लेकर डाटा तक में किए जा रहे जरूरी सुधारात्मक उपाय
गोरखपुर। क्यूएस वर्ल्ड और क्यूएस सस्टेनेबिलिटी समेत विभिन्न रैंकिंग में सुधार को लेकर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने प्रयास तेज कर दिए हैं। रैंकिंग में सुधार के लिए धरातल से लेकर डाटा तक में जरूरी सुधारात्मक उपाय किए जा रहे हैं।
क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 12 फरवरी है। इसे देखते हुए डीडीयू प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारी की है। डीडीयू लगातार दो बार क्यूएस की एशिया और दक्षिण एशियाई रैंकिंग में जगह बनाने में सफल रहा है। इस बार डीडीयू प्रशासन का लक्ष्य रैंकिंग में सुधार है। इसे देखते हुए पिछली बार की कमियों को भी दुरुस्त करने की कवायद की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हर मानक के अनुरूप अपनी तैयारियां की है। इनमें अकादमिक एवं नियोक्ता प्रतिष्ठा, शोध प्रकाशन, पेटेंट, संकाय-छात्र अनुपात, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैश्विक सहभागिता, सतत विकास और सामाजिक प्रभाव आदि शामिल हैं।
बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय वैश्विक मानकों के अनुरूप अपने शैक्षणिक एवं शोध ढांचे को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। वैश्विक रैंकिंग केवल स्थान निर्धारण का माध्यम नहीं बल्कि संस्थागत उत्कृष्टता, पारदर्शिता और निरंतर सुधार की प्रक्रिया का मानक है। विश्वविद्यालय इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
एमएमएमयूटी ने किया आवेदन
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने क्यूएस रैंकिंग के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली है। आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. विट्ठल एल. गोले ने बताया कि शोध एवं विकास कार्यों में वृद्धि के साथ ही लगभग सभी क्षेत्रों में व्यापक सुधार हुए हैं। क्यूएस रैंकिंग में इसका असर दिखेगा।