बाजार में ओआरएस नाम से बिकने वाले अन्य उत्पाद पर लगा प्रतिबंध
विभाग ने दुकानदारों से की अपील, जांच में मिला नकली ओआरएस पैकेट तो होगी कार्रवाई
गोरखपुर। डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए दिए जाने वाला ''''ओआरएस'''' (ओरल रिहाइड्रेशन साॅल्यूशन) डब्ल्यूएचओ मानक के अनुरूप होने पर ही उपयोग लायक होगा। बाजार में इस नाम का दुरुपयोग करते हुए बहुत सारे पेय पदार्थों पर ओआरएस लिखकर बेचा जा रहा है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इसका संज्ञान लेते हुए ओआरएस शब्द के अनुचित उपयोग पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। खाद्य व्यवसाइयों को चेतावनी दी गई है कि वे अपने किसी भी खाद्य या पेय उत्पाद में ''''ओआरएस'''' शब्द का प्रयोग ब्रांड नाम, उत्पाद नाम, लेबल, ट्रेडमार्क या विज्ञापन के रूप में न करें।
खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, हाल के निरीक्षणों में यह पाया गया कि बाजार में कई पेय पदार्थ ओआरएस नाम का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रहे हैं। उपभोक्ता इन्हें चिकित्सकीय रूप से मान्यता प्राप्त ओआरएस घोल समझते हैं, जबकि इनका रासायनिक संयोजन विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप नहीं है। केवल वे चिकित्सकीय उत्पाद ही ''''ओआरएस'''' शब्द का प्रयोग कर सकते हैं जो फार्माकोपिया मानकों पर खरे उतरते हैं और चिकित्सकीय रूप से स्वीकृत हों।
जांच में पकड़े जाने पर होगी कार्रवाई
सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जिले में सभी लाइसेंसधारी और पंजीकृत खाद्य व्यवसाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापनों से ''''ओआरएस'''' शब्द को तुरंत हटाएं। जांच के दौरान निर्देशों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित विक्रेता या निर्माता के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।