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Gorakhpur News: गहिरा गांव और डेरवा से सूबेदार नगर माझा मार्ग पर चढ़ा बाढ़ का पानी

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डेरवा से सूबेदार नगर माझा जाने वाले मार्ग पर चढ़ा बाढ़ का पानी।
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सरयू के बाद अब आमी का बढ़ा जलस्तर, छह गांव हुए बाढ़ प्रभावित
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सरयू नदी के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर, राप्ती में 27 सेंटीमीटर की आई कमी
गोरखपुर। नेपाल की बारिश का असर आमी नदी पर भी दिखने लगा है। सिद्धार्थनगर के सिकहरा ताल से निकली नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ रहा है। सोमवार शाम को सहजनवां क्षेत्र के गहिरा गांव के सामने इस नदी का पानी रास्ते पर बहने लगा। इससे बाढ़ प्रभवित गांवों की संख्या छह हो गई है। वहीं, चिल्लूपार क्षेत्र के डेरवा से सूबेदार नगर माझा मार्ग पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने से आवागमन बाधित हो गया है।
उधर, सरयू नदी में 10 सेंटीमीटर और राप्ती नदी के जलस्तर में 27 सेमी की गिरावट आई है, हालांकि इससे अभी बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत नहीं मिली है। बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासन की तरफ से पांच नावें लगाई गई हैं। इसके अलावा 390 राशन पैकेट का वितरण किया गया है। सरयू नदी रविवार को बरहज में खतरे के निशान से 1.05 मीटर ऊपर हो गई थी। इससे बड़हलगंज क्षेत्र के पांच गांव बगहा देवार, ज्ञानकोल, नेतवारपट्टी, बिहुआ मुस्तकील और कोटिया निरंजन बाढ़ की चपेट में आ गए थे। सोमवार को नदी बरहज में खतरे के निशान से 95 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। वहीं, अयोध्या में इसका जलस्तर खतरे के निशान से अब मात्र 26 सेमी ऊपर है। वहीं राप्ती नदी लाल निशान से 1.81 मीटर, रोहिन तीन मीटर और गोर्रा नदी डेढ़ मीटर नीचे बह रही है।
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24 घंटे में ही उफना गई आमी नदी
अब तक सूखी दिख रही आमी नदी में पानी अचानक से बढ़ने लगा है। माना जा रहा है कि नेपाल में हुई बारिश और बूढ़ी राप्ती का पानी बढ़ने से सिकहरा ताल का जलस्तर बढ़ा है, जिससे आमी नदी का पानी भी बढ़ रहा है। इस वजह से सहजनवां तहसील का गहिरा गांव बाढ़ से प्रभावित हो गया है। इस गांव के रास्ते पर पानी बहने से आवागमन अवरुद्ध हो गया है। आमी नदी का पानी नापने के लिए कहीं गेज नहीं लगा है। नदी का पानी बढ़ने से आसपास के किसान चिंतित हो गए हैं।

बाढ़ प्रभावित गांवों में बांटे गए राहत किट व भोजन के पैकेट
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के लिए सामुदायिक रसोई पटना चौराहे पर चलाई जा रही है। यहां से 2700 पैकेट गरम भोजन के पैकेट लोगों में वितरित किए गए। जो लोग बाढ़ से घिरे अपने घरों में ही रुके हैं, उन तक नाव से भोजन के पैकेट भेजे जा रहे हैं।

बाढ़ प्रभावितों के लिए लगा स्वास्थ्य कैंप
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के लिए स्वास्थ्य कैंप लगाया गया है। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डेरवां के चिकित्सक लोगों का उपचार कर रहे हैं। वहां के लोग अपने पशुओं को लेकर सड़क पर शरण लिए हुए हैं। पशु पालकों को राशन किट और पके भोजन दिए जा रहे हैं। हालांकि, पशुओं के चारा की व्यवस्था नहीं की गई। इससे पशु पालक परेशान हैं।

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डेरवा से सूबेदार नगर माझा मार्ग पर बाढ़ के पानी से बढ़ी मुश्किलें
- सरयू और राप्ती नदियों का जलस्तर घटा, कछार और दियारा के लोगों ने ली राहत की सांस
संवाद न्यूज एजेंसी

चिल्लूपार। बड़हलगंज ब्लाॅक क्षेत्र में सरयू और राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार को कम होना शुरू हो गया लेकिन बाढ़ से घिरे गांवों की स्थिति जस की तस है। कोटिया निरंजन, बगहा देवार, जैतपुर, नेतवार पट्टी और ज्ञानकोल गांव में ग्रामीण नाव से लोग आ-जा रहे हैं। रामजानकी मार्ग से जुड़े डेरवा से सूबेदार नगर माझा मार्ग पर बाढ़ का पानी चढ़ने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है।
ग्रामीण राघवेंद्र मिश्र, शिवम पांडेय, सत्यसेन सिंह और प्रेम प्रकाश सिंह ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित गांवों में जलभराव है। खेतों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। चार दिनों से कछार और दियारा के दर्जन भर से अधिक गांव प्रभावित हैं। उन गांवों में राहत सामग्री वितरित किए जाने की मांग की गई है।


कोट
बाढ़ प्रभावित गांवों में नावें चल रही हैं। विभिन्न गांवों के 1350 बाढ़ पीड़ितों को सुबह-शाम भोजन उपलब्ध कराया गया है। सभी राजस्व कर्मी बाढ़ क्षेत्र में जमे हुए हैं। राप्ती और सरयू का जलस्तर घटने लगा है। बहुत जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी।
- अमित कुमार जायसवाल, एसडीएम, गोला


बिसरा गांव में बाढ़ का पानी स्थिर, संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा

- मच्छर व कीटों से लोग परेशान, ग्रामीणों ने फाॅगिंग कराने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी

गोला। क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित बिसरा गांव में बाढ़ का पानी स्थिर बना हुआ है। ग्रामीणों में संक्रामक बीमारों का खतरा बढ़ गया है। वहीं, मच्छरों व कीटों से लोग परेशान हैं। लोगों ने फाॅगिंग कराने की मांग की है।
रविवार को गोला में सरयू नदी का जलस्तर 74.10 मीटर पर स्थिर रहा। बाढ़ प्रभावित गांवों में स्थिति सामान्य बनी रही। बिसरा गांव के रामपलट, रामवृक्ष मौर्य, राजकुमार, गोविंद कुमार, संतोष कुमार आदि ने बताया कि गांव में बाढ़ का पानी चार दिन से जस का तस बना हुआ है। गांव में मच्छरों व कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। लोगों का घर में रहना दुश्वार हो गया है। स्थानीय सभासद तिलकधारी प्रसाद ने बताया कि फाॅगिंग के लिए विभाग को अवगत कराया गया है। इस संबंध में एसडीएम अमित जायसवाल ने बताया कि फाॅगिंग के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाएगा।

बाढ़ से घिरे गांवों में हैंडपंप दे रहे दूषित पानी, मच्छरों का प्रकोप बढ़ा
- नदियों का जलस्तर थमने से 20 गांव के लोगों ने ली राहत की सांस

संवाद न्यूज एजेंसी
बड़हलगंज। सरयू व राप्ती नदी का जलस्तर लगातार तीन दिनों तक वृद्धि के बाद रविवार शाम से थमा है। बाढ़ से घिरे लगभग 20 गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों में हैंडपंप का पानी दूषित जल दे रहा है। यही पानी पीने को लोग मजबूर हैं। उधर, गांवों में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। इसके चलते कटान पीड़ित बेबस जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

सड़क के किनारे कटान पीड़ितों की रात जागते बीत रही है। बगहा के गौरी साहनी, नन्हे पाल, गोविंद, निरजंन, इंदल पाल, सुरेंद्र यादव का कहना है कि बाढ़ के समय सभी अधिकारी और नेता आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं।
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राहत सामग्री वितरण करने की हो रही मांग
बाढ़ व कटान प्रभावित गांव बगहा के अमरनाथ, बेचनी देवी, शिवानंद, सूरज, सोनू, अजयपुरा के राम अवध, बरडीहा के प्रेम सागर आदि ने तहसील प्रशासन से राहत सामग्री वितरित किए जाने की मांग की।
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