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फर्जी स्टांप : पांच साल के बैनामों में लगे स्टांप की हो रही जांच

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2022 में नवाब आरजू गैंग के एक सदस्य ने 80 हजार के स्टांप की वापसी के लिए किया था आवेदन, स्टांप फर्जी निकला
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जिस रजिस्ट्री में 5000 हजार से अधिक के स्टांप लगे हैं उनका कोषागार में कराया जा रहा परीक्षण
गोरखपुर। शासन के निर्देश पर मंडल के चारों जिलों गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर में जमीनों की रजिस्ट्री में लगाए गए पांच हजार से अधिक के स्टांप की जांच की जा रही है। शक है कि धंधेबाजों ने रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप लगा दिए हैं। वर्ष 2015 से 2020 तक की रजिस्ट्री में लगे स्टांप को कोषागार भेजकर उसकी असलियत का परीक्षण हो रहा है। इसमें तीन साल से ज्यादा की रजिस्ट्री की जांच हो चुकी है। शासन ने इस संबंध में जल्द रिपोर्ट भेजने को कहा है।

दरअसल, वर्ष 2022 में फर्जी स्टांप छापने वाले सिवान (बिहार) के कमरुद्दीन के बेटे नवाब आरजू के गिरोह से जुड़े एक युवक ने तत्कालीन एआईजी स्टांप वाल्मिकी त्रिपाठी के यहां 80 हजार रुपये का स्टांप देकर कटौती कर रुपये वापसी का आवेदन किया। एआईजी स्टांप ने जब इसकी जांच कराई तो पता चला कि स्टांप ही फर्जी है। आवेदक को बुलाया गया पर वह नहीं आया। इसकी जानकारी प्रशासन को दी गई और मामले में एसटीएफ को जांच के लिए लगाया गया। जांच जब आगे बढ़ी तो नवाब आरजू के गिरोह का नाम सामने आया। नवाब आरजू और उसके गैंग का फर्जी स्टांप छापने का धंधा बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली के अलावा देश के कई राज्यों में फैला है। हालांकि, नवाब आरजू और उसके गैंग के सदस्य जेल में हैं लेकिन इसके बाद शासन ने वित्तीय वर्ष 2015 से 2020 तक के जितने भी बैनामे में पांच हजार या इससे ज्यादा के स्टांप लगाए गए हैं सबकी जांच का निर्देश दिया। इसके बाद ई-स्टांप चलन में आ गया। गोरखपुर में करीब 50 हजार रजिस्ट्री की जांच होनी है।
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इसी क्रम में गोरखपुर मंडल में जांच चल रही है। जानकारी के मुताबिक, 2015 से 2018 तक के स्टांप की जांच करा ली गई है। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। उधर, अपर महानिरीक्षक निबंधन आशीष कुमार ने 25 अप्रैल को सभी डीआईजी और एआईजी स्टांप को पत्र भेजकर सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है।
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कोट
शासन के निर्देश पर रजिस्ट्री में लगाए गए 5000 रुपये से ऊपर के स्टांप की जांच कराई जा रही है। अभी तक की जांच में फर्जी स्टांप नहीं मिला है। सभी रजिस्ट्री की जांच रिपोर्ट जल्द ही मुख्यालय को भेजा जाएगा।
मनोज शुक्ला, डीआईजी स्टांप
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