गोरखपुर। चिड़ियाघर में दर्शकों को जेब्रा देखने का ख्वाब अभी पूरा होते नहीं दिख रहा है। डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर इस्रायल से लाए जेब्रा को लखनऊ से गोरखपुर चिड़ियाघर लाने में सफलता नहीं मिली।
चिड़ियाघर प्रबंधन अब जेब्रा के बाड़े में जिराफ को लाने की कवायद कर रहा है। इसके लिए बाड़े में परिवर्तन करना होगा, जिसके लिए चिड़ियाघर प्रबंधन सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) को पत्र लिखेगा।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के उद्घाटन के बाद से ही जेब्रा का बाड़ा खाली है। गोरखपुर चिड़ियाघर के लिए इस्रायल से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर छह जेब्रा लाए गए थे। इन्हें लाने के बाद लखनऊ चिड़ियाघर में रखा गया था। इसके बाद इन्हें गोरखपुर चिड़ियाघर लाने की तैयारी की गई, लेकिन जिस बाड़े में वे रखे गए उसमें वह पकड़ में नहीं आ सके। कई बार चिड़ियाघर प्रशासन ने प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इतना ही नहीं यहां से छह माह के लिए लखनऊ चिड़ियाघर में जू-कीपर भेजे गए। इनके भेजने का उद्देश्य था जेब्रा से जान-पहचान और उनके हाव-भाव को समझना, लेकिन वह भी सफल नहीं हुए। इस बीच दो जेब्रा की मौत भी हो गई। इसके बाद फिर एक कमेटी बनी, जिसने जेब्रा पर अध्ययन किया। इसमें पता चला कि अब उन्हें लखनऊ की आबोहवा रास आ गई है।
चिड़ियाघर प्रबंधन की कोशिश है कि यहां जिराफ को लाया जाए। जिराफ भी लंबा जानवर है और यहां का मौसम भी उसके लिए अनुकूल है। जिराफ को आमतौर पर गर्म और शुष्क मौसम पसंद होता है।