चिल्लूपार। बड़हलगंज ब्लाॅक क्षेत्र के दियारा में सरयू नदी खतरे के निशान से एक मीटर 30 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन ज्ञानकोल और बगहा देवार गांव में नदी ने कटान तेज कर दी है। नदी की तेज धारा से खेत में फसल बर्बाद हो रही है और अब नदी आबादी की ओर बढ़ने लगी है। ग्रामीण दहशत में हैं। उनका कहना है कि कटान की गति तेज होने से उनकी आजीविका और घर खतरे में हैं। विभाग की तरफ से कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।
तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीण कटान की विभीषिका से परेशान हैं। दियारा क्षेत्र के कई किसान भूमिहीन हो चुके हैं। करीब एक हजार बीघा कृषि भूमि सरयू में विलीन होने की संभावना जताई जा रही है। इतनी बड़ी आपदा के बाद सिंचाई विभाग को स्थायी रूप से कटान रोधी कार्य करने की जरूरत है, लेकिन अभी तक शासन को प्रस्ताव बनाकर भी नहीं भेजा गया है। अस्थायी कटान रोधी कार्य से ही काम चलाया जा रहा है, जो नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीण खुद बांस-बल्ली और बोरे में मिट्टी-बालू भरकर कटान रोकने की कोशिश में जुटे हैं।
जानकारी के अनुसार, कटान का सर्वाधिक प्रभाव ज्ञानकोल और बगहा देवार में है। यहां बचाव रोधी कार्य से कटान पर अंकुश नहीं है। क्षेत्र के जोखन मिश्र, रमेश शाही,अमन सिंह, राजबहादुर तिवारी, ओमप्रकाश तिवारी, सतेंद्र तिवारी, सुनिल कुमार सिंह आदि ने बताया कि में गोला से लेकर पटना सरयू नदी पर तटबंध नहीं है। हर साल तटबंध के लिए शासन और प्रशासन से मांग करते हैं, लेकिन अनसुना कर दिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध न होने से हजारों एकड़ खेती योग्य जमीन और कुछ घर सरयू में प्रत्येक वर्ष समाहित हो जाते हैं, जबकि संबंधित विभाग कटान रोकने के लिए करोड़ों रुपये हर वर्ष खर्च करता है। अगर तटबंध बन जाता तो गोला तहसील क्षेत्र के दो नगर पंचायत और पचासों गांव हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाते।
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वर्जन
कटान स्थलों पर रात-दिन बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। ज्ञानकोल और बगहा देवार गांव पर नदी की धारा का दबाव तेज है। वहां के लिए ड्राइंग एप्रूवल किया जा रहा है। 15 तक शासन में रिपोर्ट बनाकर भेजना है। आने वाली बाढ़ से पूर्व विभाग वहां तैयारी कर लेगा। सरयू नदी पर तटबंध बनाना संभव नहीं है। -जयप्रकाश सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग, गोरखपुर