दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले उच्च शिक्षामंत्री योगेंद्र उपाध्याय
गोरखपुर। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि पहले प्रदेश की शिक्षा बीमारू थी लेकिन आज उत्कृष्टता पर है। इसी की देन है कि छह सरकारी और सात निजी विश्वविद्यालय ए प्लस ग्रेड में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा वह है जो ज्ञान व विज्ञान के साथ स्वावलंबी बनाए। शिक्षा केवल पढ़ाना नहीं बल्कि सिखाना और संस्कार देना भी शिक्षक का धर्म है।
उच्च शिक्षामंत्री सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को बतौर विशिष्ट अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गोरक्षनगरी आध्यात्म की नगरी है। यहां गीता प्रेस है, मंदिर, मठ और चौरीचौरा है। आध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना यहां की पहचान है।
उन्होंने कहा कि हर मां-बाप अपने बेटे और शिक्षक अपने छात्र को आगे देखना चाहते हैं। इनके ऋण से कोई मुक्त नहीं हो सकता है। इस संबंध में कोई स्वार्थ नहीं होता है। इनके बिना मेडल हासिल कर पाना संभव नहीं है। मेडल प्राप्त करने वाले छात्र देश और समाज के लिए मॉडल बने। स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा को ज्ञान, विज्ञान नैतिकता, संस्कार से जोड़ें। इसी को आधार मानकर नई शिक्षा नीति संस्कार, रोजगार तकनीक को जोड़कर पाठ्यक्रम बना रहा है।
उन्हाेंने कहा कि अवसर को उपलब्धियों में बदलने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरणा लेने की जरूरत है। उन्होंने इसे साबित कर समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक भारत का डंका बजाया है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर चुनौती दी है और प्रधानमंत्री ने इसे स्वीकार किया है। मोदी ने स्वदेशी अपनाने का संकल्प लेकर एक मिशन दिया है आपको पैशन से चुनौतियों का सामना करना है।