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Gorakhpur News: आमी नदी के किनारे बांध के लिए ड्रोन सर्वे से जगी उम्मीद.. बाढ़ से बचेंगे सैकड़ों गांव

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हर साल बरसात में आमी नदी की बाढ़ से सहजनवां और खजनी तहसील में डूबती हैं फसलें
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वर्ष 2010 में बांध बनाने का कार्य शुरू हुआ था लेकिन 15 साल में भी नहीं हो सका पूर्ण
गोरखपुर-वाराणसी हाइवे को बचाने के लिए कराया गया है बोल्डर पिचिंग
अब आमी नदी पर बांध के अधूरे कार्य पूरे कराने के लिए सिंचाई विभाग ने कराया ड्रोन सर्वे

गोरखपुर। सिद्धार्थनगर के सिकहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में कौड़ीराम के पास सोहगौरा में राप्ती नदी में विलीन होने वाली आमी नदी के दोनों किनारे पर भी बांध बनाया जाएगा। 102 किमी लंबी नदी के किनारे तटबंध बनाने के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से ड्रोन सर्वे करा लिया गया है। पहले चरण में कौड़ीराम से लेकर छपिया तक दोनों तरफ मिलाकर 48 किलोमीटर लंबा बांध बनेगा। सर्वे की रिपोर्ट जब गंडक जोन को मिलेगी, उसके बाद डीपीआर बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। बांध बनने से संतकबीरनगर और गोरखपुर जिले में चार तहसीलों की हजारों हेक्टेयर खेती हर साल बाढ़ से बर्बाद होने से बच जाएगी।
अब सूखने के कगार पर पहुंच चुकी आमी नदी हर साल बरसात में लबालब भर जाती है। उस दौरान इस नदी में सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और गोरखपुर जिले के कई बरसाती नालों का पानी भी गिरने लगता है। इसके अलावा गोरखपुर में जब राप्ती नदी में पानी बढ़ता है तो आमी नदी में उल्टा पानी बहने लगता है। इससे आमी का पानी खजनी और सहजनवां तहसील के कई गांवों में फैलने लगता है। गोरखपुर-वाराणसी रोड के किनारे नदी का पानी गीडा क्षेत्र में भी फैल जाता है। इससे गीडा व नौसड़ इलाके के पीछे तक बाढ़ आ जाती है। कौड़ीराम, उनवल, खजनी, सहजनवां के साथ ही संतकबीरनगर के मगहर, खलीलबाद, बखिरा और मेंहदावल ब्लॉक के सैकड़ों गांव बाढ़ से प्रभावित हो जाते हैं। खेतों में भरा बाढ़ का पानी बरसात बाद भी नहीं निकल पाता, जिससे हर साल हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद होती है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित इलाके में संक्रामक बीमारियां भी फैलती हैं। इसे देखते हुए नदी के दोनों किनारे तटबंध बनाने की कवायद वर्ष 2007 में बसपा सरकार ने शुरू किया था। नदी के दोनों तरफ कुछ स्थानों पर बांध का कार्य शुरू किया गया लेकिन कहीं-कहीं थोड़ी बहुत मिट्टी डालकर काम बंद कर दिया गया। कुछ वर्षों में वह मिट्टी भी नदी के साथ बह गई।
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सीएम के निर्देश के बाद शुरू हुआ ड्रोन सर्वे
आमी की बाढ़ से हर साल गोरखपुर जिले में होने वाली दिक्कत मुख्यमंत्री तक पहुंची। पिछले साल गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर इस नदी का पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित होने लगा। इसके बाद कौड़ीराम से सोहगौरा तक हाईवे के किनारे बोल्डर पिचिंग कराई गई। इसके बाद से ही नदी के दोनों किनारों पर बांध बनाने की चर्चा होने लगी थी। एक सप्ताह पहले ड्रोन से सर्वे शुरू हुआ तो यह आस जगी कि बांध का कार्य एक बार फिर शुरू होगा। सिंचाई विभाग के अभियंताओं के मुताबिक यह सर्वे ऑडिट सेक्शन की तरफ से कराया गया है।

नदी का बच जाएगा वजूद
पर्यावरणविद और एमएमएमयूटी के प्रो. गोविंद पांडेय कहते हैं कि आमी नदी में बारिश का जो पानी आता है, वह अगल-बगल के खेतों में फैलकर बाढ़ का कारण बनता है, जिससे हजारों एकड़ खेती नष्ट होती है। अगर इसके किनारे बांध बन जाए तो बरसात के दिनों में भी अगल-बगल के खेतों की फसल बच जाएगी। इसके अलावा नदी के कैचमेंट एरिया में पानी बचने से नदी का बहाव सतत बना रहेगा। इससे नदी के पुनर्जीवित होने की संभावना बढ़ जाएगी। बांध बनने के बाद नदी के दोनों तरफ पौधरोपण की भी संभावना बढ़ जाएगी। इसका सकारात्मक प्रभाव नदी के बहाव पर पड़ेगा।
बांध बनाने के लिए दोनों तरफ खरीदनी पड़ेगी जमीन
सिंचाई विभाग के अभियंताओं के अनुसार बांध बनाने के लिए जमीन चाहिए। राजस्व विभाग के रिकार्ड के साथ हुए ड्रोन सर्वे के बाद यह देखा जाएगा कि कितनी जमीन सरकारी मिल रही है और कितनी जमीन अधिग्रहित करनी पड़ेगी। कौड़ीराम से लेकर छपिया तक जिन किसानों की जमीन है, उनसे बातकर जमीन खरीदी जाएगी। नदी का कैचमेंट एरिया बेहद कम होने की वजह से दोनों तरफ खेत बन गए हैं।
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कोट
आमी नदी के दोनो तरफ 24-24 किमी तटबंध बनाया जाना है। बसपा सरकार में कार्य शुरू किया गया था लेकिन वह पूरा नहीं हो सका था। ऑडिट विभाग की तरफ से ड्रोन सर्वे हुआ है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद सिंचाई विभाग आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा। विभाग को यह देखना है कि कितनी जमीन का पजेशन मिल गया है और कितना उसे काम शुरू करने के लिए चाहिए।
वीपी सिंह, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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