भगवान शालिग्राम से होगा माता तुलसी का विवाह, श्रद्धालु व्रत भगवान विष्णु की करेंगे आराधना
18 नवंबर से शुरू हो जाएगा सहालग
गोरखपुर। देवोत्थान एकादशी शनिवार को धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रहकर भगवान विष्णु की आराधना करेंगे। भगवान को गन्ना, सुथनी और गंजी अर्पण करेंगे। भगवान शालिग्राम से माता तुलसी का विवाह धूमधाम से किया जाएगा। इस दिन चतुर्मास का समापन होगा। इसके बाद से मांगलिक कार्य हो सकेंगे।
गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि इस दिन चार महत्वपूर्ण योग रवियोग, ध्रुव योग, आनंद योग और त्रिपुष्कर योग बन रहा है। इसलिए इस दिन पूजन, अर्चन, दान, शुभ कर्मों का अक्षय फल प्राप्त होगा। इस दिन भगवान शालिग्राम से माता तुलसी का विवाह धूमधाम से किया जाएगा।
माना जा रहा है कि सूर्य की चाल की वजह से इस बार देवउठनी एकादशी पर विवाह का मुहूर्त नहीं है। सूर्य, शुक्र के स्वामित्व वाली राशि तुला में रहेंगे। 16 नवंबर तक तुला संक्राति दोष रहेगा। इसी कारण एक नवंबर यानी देवउठनी एकादशी के दिन कोई विवाह मुहूर्त नहीं है। इस दिन विवाह को छोड़कर अन्य मांगलिक काम हो सकेंगे। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, सूर्य वृश्चिक राशि में 16 नंवबर को प्रवेश करेंगे। उसके बाद 18 नवंबर से सहालग शुरू हो जाएगा।
वहीं, बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि देवउठनी एकादशी के दिन बिना पंचांग देखे शादियां होती हैं, लेकिन ग्रहों की चाल व नक्षत्र भी अनुकूल होने चाहिए।
- तुलसी विवाह का होगा भव्य आयोजन
कान्हा सेवा संस्थान की ओर से शनिवार को तुलसी विवाह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। अग्रसेन शीशमहल से निकलने वाली झांकी हजारीबाग पहुंच कर संपन्न होगी। संस्था की अध्यक्ष स्मृति गुप्ता, मुख्य संरक्षक राजेश कुमार अग्रवाल और प्रबंधक अनुपम कुमार ने बताया कि हल्दी का कार्यक्रम सुबह नौ बजे से होगा। शाम चार बजे से बारात निकाली जाएगी। इसके बाद भगवान शालीग्राम से माता तुलसी का विवाह धूमधाम से होगा। उनका कहना है कि इस दिन दो निर्धन कन्या श्रीजल और काजल का विवाह भी किया जाएगा। विवाह समारोह के बाद समाज के उत्कृष्ट कार्य करने वालों और मुख्य अतिथियों को सम्मानित किया जाएगा। इसे लेकर संस्था की ओर से शुक्रवार को विवाह की तैयारी की गई।