गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय अकादमिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर विद्यार्थियों की डिग्री और अन्य प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। इस नई व्यवस्था को लाने के पीछे विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड की सुरक्षा, पारदर्शिता और पहुंच को बढ़ाना है। अगले सत्र से यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
ब्लॉकचेन तकनीक से एक बार डिग्री जारी होने के बाद इसमें बदलाव या छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता। यह विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पूर्व छात्रों के लिए फायदेमंद होगा, जिन्हें विदेश में रोजगार या आगे की पढ़ाई के लिए सत्यापित शैक्षणिक प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। इससे अकादमिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और प्रबंधन के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा। यह तकनीक न केवल सत्यापन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगी बल्कि डिग्रियों की प्रामाणिकता भी सुनिश्चित करेगी।
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ब्लॉकचेन तकनीक के फायदे
विश्वविद्यालय में कई तरह की श्रमिक गतिविधियों की जरूरत पड़ती है, जिसमें मुख्य रूप से छात्र रिकॉर्ड बनाना व रखना शामिल है। इसे रखने, अपग्रेड करने और रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से एक्सेस करने की अनुमति देने में ब्लॉकचेन बहुत उपयोगी हो सकता है। छात्र की डिग्री व डिप्लोमा डॉक्यूमेंट को कागजों से निकालकर ब्लॉकचेन पर संग्रहित किया जा सकता है। छात्रों को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में दाखिला लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ब्लॉकचेन की मदद से छात्र के रिकॉर्ड को एक से दूसरे संस्थान तक आसानी से पहुंचाए जा सकते हैं।
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कोट...
डिग्री जारी करने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक को अपनाना नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह तकनीक न केवल अकादमिक प्रमाणपत्रों को सत्यापित करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगी बल्कि हमारी डिग्रियों की प्रामाणिकता भी सुनिश्चित करेगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति