डीडीयू में कई पाठ्यक्रमों में ईडब्ल्यूएस, ओबीसी और एससी-एसटी संवर्ग की सीटें बड़ी संख्या में खाली
तीसरे चरण की चल रही काउंसिलिंग, अब सीटें बचने पर सामान्य करने की तैयारी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रवेश के दौरान चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। दो चरणों की काउंसिलिंग के बाद जो सीटें रिक्त रह गई हैं, उनमें लगभग 80 प्रतिशत आरक्षित वर्ग की हैं। इनमें कई विषयों में सीटों के सापेक्ष आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ही नहीं हैं, जबकि अनारक्षित वर्ग में सीटें भरने के कारण प्रवेश ही नहीं मिल पा रहा है। इसे देखते हुए डीडीयू प्रशासन अब स्पॉट काउंसिलिंग के बाद बची सीटों को सभी के लिए खोलने पर विचार कर रहा है।
डीडीयू में प्रवेश को लेकर वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ोंं की बात करें तो विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 736 सीटें (बीए को छोड़कर) दो चरणों की काउंसिलिंग के बाद रिक्त रह गईं। इनमें अनारक्षित संवर्ग (ओपन कैटेगरी) में महज 148 सीटें (20.10 प्रतिशत) ही रिक्त हैं। आरक्षित संवर्ग ईडब्ल्यूएस में 145, ओबीसी में 178, एससी में 207 और एसटी में 22 सीटें रिक्त हैं। कुल 38 पाठ्यक्रमों में रिक्त इन सीटों में से स्पॉट काउंसिलिंग में अब तक लगभग 23 विषयों में प्रवेश पूरा हो चुका है।
इस काउंसिलिंग में भी ज्यादातर सीटें रिक्त रह जा रही हैं। स्पॉट काउंसिलिंग में अभ्यर्थी तो पहुंच रहे हैं लेकिन उनके संवर्ग में सीटें रिक्त न रहने के कारण वे प्रवेश से वंचित रह जा रहे हैं। उधर, जिन संवर्ग के लिए सीटें रिक्त हैं, उनमें या तो अभ्यर्थी हैं ही नहीं या फिर पहुंच नहीं रहे हैं।
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विभागाध्यक्ष कर रहे सीटें तब्दील करने का आग्रह
स्पॉट काउंसिलिंग में भी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के नहीं पहुंचने के कारण सीटें रिक्त रह जा रही हैं। इसे देखते हुए कई विभागों के अध्यक्ष ने अब सीटें सामान्य किए जाने के लिए आग्रह पत्र भेजना शुरू कर दिया है।
ये हैं प्रावधान
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से वर्ष 2006 में प्रवेश को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके मुताबिक, तीन चरणों तक आरक्षित संवर्ग के अभ्यर्थियों को प्रवेश का मौका दिया जाना अनिवार्य है। उसके बाद रिक्त सीटें सभी के लिए उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इसके तहत सभी वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए मेरिट के आधार पर प्रवेश के लिए एक समान अवसर होंगे।
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कोट
प्रवेश के लिए तीसरे चरण की काउंसिलिंग चल रही है। इसके बाद भी जो सीटें खाली रह जाएंगी, उनकी समीक्षा की जाएगी। शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। -प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू