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डीडीयू : स्पेशल बैक परीक्षा में शामिल होंगे 6125 विद्यार्थी

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सितंबर के दूसरे पखवाड़े में विशेष परीक्षा की तैयारी, प्रतिदिन चार पालियों में होगी परीक्षा
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थ्योरी में सर्वाधिक 3394, माइनर में 2019 और प्रैक्टिकल में 712 विद्यार्थी होंगे शामिल
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं की स्पेशल बैक परीक्षाएं सितंबर के दूसरे हफ्ते से शुरू हो सकती है। इसमें डीडीयू व कॉलेजों के कुल 6125 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। स्पेशल बैक परीक्षाओं को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

डीडीयू और कॉलेजों में तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के पांचवें व छठे और चार वर्षीय स्नातक के सातवें व आठवें सेमेस्टर में हजारों छात्र-छात्राओं का बैक पेपर लग गया। इससे उन विद्यार्थियोंं को एक साल बर्बाद होने की आशंका सताने लगी थी। छात्र लगातार स्पेशल बैक परीक्षाओं की मांग कर रहे थे।
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छात्रहित में डीडीयू प्रशासन ने स्नातक अंतिम वर्ष के उन विद्यार्थियों को राहत देने का निर्णय लिया, जिनका अंतिम वर्ष के किसी सेमेस्टर में बैक पेपर लगा था।
स्पेशल बैक परीक्षाओं के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें सर्वाधिक 3394 विद्यार्थियों ने सैद्धांतिक परीक्षा के लिए फॉर्म भरा है। इसके अलावा माइनर कोर्सेज में 2019 व प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए 712 ने फॉर्म भरा है। प्रतिदिन चार पालियों में परीक्षाएं संपन्न कराने की तैयारी है।

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डीडीयू कैंपस में होंगी सभी परीक्षाएं
स्पेशल बैक की सभी परीक्षाएं विश्वविद्यालय परिसर में होंगी। कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय आना होगा। सभी परीक्षाएं 10 से 12 दिनों में कराने की योजना है। इसे लेकर परीक्षा विभाग समय सारिणी तैयार कर रहा है। इसी हफ्ते समय सारिणी और दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

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233 विषयों की होंगी बैक परीक्षाएं
सैद्धांतिक, माइनर और प्रैक्टिकल के कुल 233 विषयों की स्पेशल बैक परीक्षाएं होंगी। इनमें सैद्धांतिक के 151 पेपर, प्रैक्टिकल के 52 और माइनर के 30 पेपर शामिल हैं। प्रश्नपत्रों को लेकर तस्वीर साफ होेने के साथ ही मॉडरेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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कोट
विद्यार्थियों का एक वर्ष बचाने के लिए उन्हें यह विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है। साथ ही बैक पेपर प्रणाली में आवश्यक सुधारों पर भी कार्य किए जा रहे हैं, ताकि इसे और अधिक पारदर्शी, छात्र हितैषी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सके।
-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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