दो किलोमीटर नाले का निर्माण अधूरा, प्रभावित निर्माण न टूटने से हो रही है देरी
गोरखपुर। बरसात खत्म होने के साथ अब गोड़धोइया नाले का निर्माण दोबारा शुरू हो गया है। प्रभावित निर्माण न तोड़ने से कार्यदायी संस्था को दिक्कतें आ रही हैं लेकिन जहां जमीन खाली है वहां पर तेजी से निर्माण हो रहा है। मार्च 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। अभी दो किलोमीटर नाले का निर्माण अधूरा है।
495.24 करोड़ रुपये से अमृत 2.0 कार्यक्रम में शामिल गोड़धोइया नाला चैनलाइजेशन, रामगढ़ताल जीर्णोद्धार और इन्टरसेप्शन, डायवर्जन एवं ट्रीटमेंट का काम चल रहा है। शनिवार को मैत्रीपुरम, आदित्यपुरी, सरस्वतीपुरम में निर्माण हो रहा था। मैत्रीपुरम में नाले के लिए जेसीबी से खोदाई हो रही थी। अब तक 9.25 किलोमीटर लंबाई के सापेक्ष 7.3 किलोमीटर नाला, 17.95 किलोमीटर इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन के सापेक्ष 5.8 किलोमीटर सीवर लाइन का निर्माण पूरा हो चुका है। 38 एमएलडी एसटीपी का 80 फीसदी और 61 एमएलडी एमपीएस का 70 फीसदी काम पूर्ण हो चुका है। कुल मिला कर परियोजना की कार्य प्रगति 75 फीसदी दर्ज है।
कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) ने जून में बारिश शुरू होने के कारण नाला निर्माण का काम अस्थायी रूप से रोक कर आमजन को असुविधा के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम तैनात की। सितंबर में दोबारा काम की शुरूआत की लेकिन चार स्थानों पर एक माह की मेहनत एक अक्तूबर की बारिश में बर्बाद हो गई।
नहीं टूटे हैं 76 मकान
नाला की जद में आने वाले 76 की संख्या में ऐसे निर्माण है जिनकी रजिस्ट्री हो चुकी है, मुआवजा भी मिल चुका लेकिन वांछित चौड़ाई में निर्माण नहीं तोड़े गए। हाल ही में उप जिलाधिकारी दीपक गुप्ता, ज्ञान प्रकाश सिंह, तहसीलदार और जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार ने आदित्यपुरी एवं शक्तिनगर मोहल्लों में भवन स्वामियों से घर घर मुलाकात कर भवन स्वामियों को मकानों को चौड़ाई में तोड़ने का अनुरोध किया। ताकि निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के शीघ्र प्रारंभ कर निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके लेकिन अभी तक इसे नहीं तोड़ा गया है। अधिशासी अभियंता ने कहा कि लोगों से प्रभावित हिस्से को तोड़ने की अपील की जा रही है।