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Gorakhpur News: सीएम से सम्मान पाकर बढ़ा आत्मविश्वास..दोगुने उत्साह होगा काम

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गोरखपुर। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं मुख्यमंत्री उत्कृष्ट कार्य के लिए मुख्यमंत्री से सीसीएल कैश क्रेडिट लिंकेज प्रमाण पत्र पाकर उत्साहित हैं। उनका कहना है कि समूह को ऋण और और सम्मान मिलने से आत्मनिर्भरता को बढ़ेगी ही आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब अपने कार्य को दोगुने उत्साह के साथ करेंगी। समूह के नाम को और आगे ले जाएंगी।
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2.2 करोड़ का बिजली का बिल जमा करवा चुकी है महिमा
पिपरौली के हरदिया गांव की रहने वाली महिमा गुप्ता पिछले चार सालों से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है। गांव की 11 महिलाओं के साथ मिलकर शक्ति प्रेरणा स्वयं सहायता समूह चलाने वाली महिला विद्दुत सखी का काम करती है। गांव के साथ ही आसपास के गांवों में जाकर लोगों को बिजली के बिलों की जांच कर उन्हें भरवाने का काम करती हैं। महिमा ने बताया कि विद्दुत सखी बनने के बाद रोजगार के साथ ही लोगों के बीच पहचान मिली है। अब मुख्यमंत्री के हाथों से सम्मानित होने के बाद उत्साह बढ़ा है।

सूई- धागा नाम से बना सहायता समूह बन गई पहचान
महराजगंज की रहने वाली मंजू देवी सूई- धागा नाम से स्वयं सहायता समूह संचालित करती है। इनके समूह में कुल 11 महिलाएं अगरबत्ती- मोमबत्ती बनाने का कार्य कर अपनी पहचाना बना रही है। मंजू देवी ने कहा कि लखपति दीदी बनने पर मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया है। ग्रामीण महिलाओं काे रोजगार के कम ही अवसर मिलते थे, लेकिन इस योजना से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार की राह आसान हो गई है। लखपति दीदी बनने की खुशी है।
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दोना- पत्तल के कारोबार ने बना दिया लखपति दीदी
सहजनवां की रहने वाली संगीता देवी 12 महिलाओं के साथ मिलकर गत्ते के दोना- पत्ते बनाने का कारोबार कर रही हैं। दो वर्षों में काम में एक लाख से ज्यादा का टर्न ओवर हाेने लखपति दीदी बनने का अवसर मिला। संगीता ने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से प्रशस्तिपत्र मिलने पर समाज में नाम के साथ ही काम को सराहना मिल रही है। आगे दोगुने उत्साह के साथ हम सभी मिलकर इस कार्य को करेंगे।

ब्लॉक पर कैंटीन खुलने के घर की कमाई का साधन बढ़ा


खजनी की रहने वाली रीना देवी साबरमती प्रेरणा समूह के नाम से समूह संचालित करती है। समूह के माध्यम से 12 महिलाओं के घर के खर्च चल रहे है। रीना ने बताया कि कोविड के बाद घर में कमाई का जरिया नही था, समूह से जुड़ने के बाद हम सभी को आमदनी का जरिया मिला है। ब्लाॅक में कैंटीन के संचालन कर पिछले डेढ़़ साल में लखपति दीदी बन गई हूं। सम्मान मिलने से काम में उत्साह बढ़ा है, लोगों के बीच पहचान मिली है।
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