दिसंबर में महेवा की मछली मंडी से लिया गया था सर्विलांस सैंपल
हैदराबाद से बर्फ में रखकर आई मछलियों की शहर के अलावा आसपास के जिलों में भी होती है बिक्री
गोरखपुर। हैदराबाद से बर्फ में रखकर गोरखपुर आने वाली मछलियों पर कालरा के बैक्टीरिया बिब्रियो कालरी के मिलने की पुष्टि हुई है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने दिसंबर में महेवा मछली मंडी सहित शहर के विभिन्न स्थानों से मीट, मछली, चिकन और अंडे के 60 सर्विलांस सैंपल लिए थे। इनमें से मछली के नमूनों में बिब्रियो कालरी बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि हुई है। जल्द ही विभाग की तरफ से शहर में बाहर से आने वाली और गोरखपुर से बाहर भेजी जाने वाली मछलियों की जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा।
महेवा मंडी से सटे ही मछली मंडी है। हर दिन यहां 60 से 70 लाख रुपये की हैदराबाद से मछली आती है। वहीं 30 से 40 लाख रुपये की स्थानीय मछलियों को सुखाकर पूर्वी यूपी के असम, मेघालय, मिजोरम आदि जगहों पर भेजा जाता है। बीते दिसंबर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मछली मंडी समेत शहर में अन्य जगहों पर बिकने वाली मछली, मीट और अंडा आदि के कुल 60 सैंपल सर्विलांस के तौर पर लिया था। इन प्रारंभिक नमूनों की जांच रिपोर्ट आई है। इसमें हैदराबादी मछलियों पर कालरा के बैक्टीरिया पाए गए हैं। हैदराबाद से बर्फ में रखकर आई मछलियों की शहर के अलावा आसपास के जिलों में भी बिक्री होती है।
उमस भरे मौसम में तेजी से बढ़ते हैं बैक्टीरिया
तेज गर्मी और नम वातावरण में रखे मांस मछली में बैक्टीरिया पनपने की आशंका बढ़ जाती है। मार्च से लेकर अक्तूबर के बीच मछलियों के खराब होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच करने की तैयारी की है। जल्द ही दुबारा सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। दूसरी बार के जांच में नमूने फेल होने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई होगी। इसमें छह माह की सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
मछली विक्रेताओं का होगा पंजीकरण
खाद्य सुरक्षा विभाग ने मछली विक्रेताओं को भी पंजीकरण कराने को कहा है। 12 लाख रुपये वार्षिक से कम टर्नओवर वाले दुकानदारों का 100 रुपये में रजिस्ट्रेशन होगा। जबकि बड़े कारोबारियों को लाइसेंस लेना होगा।
वर्जन
दिसंबर में मछली, मीट और अंडे का सर्विलांस सैंपल लिया गया था। इसमें से मछली पर कालरा बीमारी के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। अब अभियान चलाकर सैंपल की जांच खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में कराई जाएगी और रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई होगी।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा