प्रति पैकेट 12-15 रुपये के मुनाफे के चक्कर में धंधेबाज कर रहे सेहत से खिलवाड़
नौसड़, ट्रांसपोर्टनगर और लालडिग्गी इलाके में कुछ घरों में चलता है खेल
गोरखपुर। शहर में नमक की री-पैकिंग का खेल लंबे समय से चल रहा है। कानपुर से थोक में पिसा हुआ सस्ता नमक यहां लाया जाता है और यहां उसे नामी-गिरामी ब्रांड के पैकेट में पैक कर बाजार में खपा दिया जाता है। नमक में नमी रोकने के लिए एंटी केकिंग एजेंट के तौर पर पोटैशियम फेरोसायनाइड मिलाया जाता है। इससे नमक फ्री फ्लो हो जाता है। 12-15 रुपये प्रति पैकेट के मुनाफे के चक्कर में धंधेबाज लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से ऐसा नमक खाने से लिवर खराब हो सकता है।
गोरखपुर के नौसड़, ट्रांसपोर्टनगर और लालडिग्गी इलाके के कुछ घरों में चोरी-छिपे चल रहा है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, थोक में सस्ता नमक लाने के बाद उसे ब्रांडेड पैकेट में भरा जाता है। इस खेल में प्रति पैकेट करीब 12 से 15 रुपये तक का मुनाफा होने के कारण इसमें शामिल लोग जोखिम उठाने से भी पीछे नहीं हटते।
दिल्ली से लाए गए रैपर में स्थानीय स्तर पर बनाई गई नकली पैकिंग इतनी सटीक होती है कि पहली नजर में ग्राहक को असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और छोटे दुकानदारों तक ये नकली पैकेट बड़ी आसानी से पहुंच जाते हैं। उपभोक्ताओं को न केवल ठगी का शिकार होना पड़ता है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ने का खतरा बना रहता है। क्योंकि बिना किसी जांच-पड़ताल और गुणवत्ता मानक के यह नमक पैक किया जाता है। त्योहार और शादियों के सीजन में इस नकली पैकेट वाले नमक की मांग और भी बढ़ जाती है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने बीते जनवरी में नौसड़ में संचालित एक नमक की फैक्टरी पर छापा मारकर कुछ सैंपल भी लिए थे।
कोट
नमक स्वाद नहीं सेहत के लिए जरूरी है। पैक्ड नमक में अलग से मिलाए गए तत्व हानिकारक होते हैं। एंटी केकिंग एजेंट, सोडियम की अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है। लंबे समय तक इसके प्रयोग से गुर्दे पर असर पड़ता है।
- डॉ. प्रशांत अस्थाना, जिला अस्पताल